मप्र में बाल श्रम के संदेह में 'बचाए' गए बच्चों के माता-पिता ने कहा- मनगढंत मामला , मुआवजे की मांग
रंजन
- 28 Apr 2026, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
अररिया , 28 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के कटनी में बाल श्रम के संदेह में रोके गए अररिया के बच्चों के अभिभावकों ने इस मामले को मनगढंत बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मुआवजा दिये जाने की मांग की है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी।
मध्यप्रदेश के राजकीय रेलवे पुलिस ( जीआरपी) ने 11 अप्रैल को बाल श्रम के संदेह में 163 विद्यार्थियों और आठ पुरुषों को हिरासत में लिया था। इसके एक दिन बाद संबंधित धाराओं के तहत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
करीब दो सप्ताह तक मध्यप्रदेश के जबलपुर और कटनी के आश्रय गृहों में रहने के बाद बच्चों को शनिवार को उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया।
सोमवार को अररिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कुछ बच्चों के अभिभावकों ने मामले को "गढ़ा हुआ" बताते हुए निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, बच्चों और शिक्षकों को मुआवजा देने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की मांग की।
अभिभावकों ने दावा किया कि बच्चे अपनी इच्छा से महाराष्ट्र और कर्नाटक के तीन मदरसों में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। उनके साथ शिक्षक थे तथा उनके पास वैध रेल टिकट, दस्तावेज और अभिभावकों की सहमति पत्र भी थे।
एक अभिभावक शौकत ने आरोप लगाया कि बच्चों को एक विशेष धर्म से संबंधित होने के कारण निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा, "प्रशासन के पास संदेह करने का कोई ठोस आधार नहीं था। सामाजिक जांच रिपोर्ट (एसआईआर) की प्रक्रिया दो बार कराई गई, जिससे देरी हुई। स्थानीय संगठनों की मदद नहीं मिलती तो बच्चों की रिहाई में और अधिक समय लगता।
उन्होंने कहा कि इस घटना का बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ा है।
अररिया के कुंडलीपुर गांव की बीबी अंजुमन ने कहा कि उनके तीन पोते कर्नाटक के बीदर स्थित एक मदरसे में पढ़ते हैं, क्योंकि वहां भोजन, आवास और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने मांग की कि अररिया में भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इस मौके पर मौजूद इमारत-ए-शरिया के काजी अतीकुल्लाह ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चे लंबे समय से शिक्षा के लिए दूर-दराज के मदरसों में जाते रहे हैं और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है।
उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन ने न तो खेद व्यक्त किया है और न ही मामला वापस लिया है।"
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अधिवक्ता नवाज ने कहा कि इस घटना से बच्चों को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
अररिया के वरिष्ठ जिला अधिकारी इस संबंध में टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।
भाषा कैलाश
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