पीएफआई के खिलाफ मामला: एनआईए अदालत ने 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए
माधव
- 05 Jun 2026, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को प्रतिबंधित संगठन 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' (पीएफआई) के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया, और कहा कि मामले में भारत सरकार को उखाड़ फेंकने तथा 2047 तक इस्लामी खलीफा का शासन स्थापित करने की साजिश का ''गंभीर संदेह'' है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 25 पीएफआई सदस्यों के साथ-साथ संगठन के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
न्यायाधीश ने कहा, ''यदि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को समग्र रूप से देखा जाए, तो यह गंभीर संदेह पैदा करती है कि आरोपियों ने 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के माध्यम से और उनकी ओर से काम करते हुए, एक बड़ी साजिश को आगे बढ़ाने के लिए सहमति जताई और उस पर अमल किया-वह साजिश थी देश के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से वर्ष 2047 तक या उससे पहले भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना और भारत में शरिया कानून के तहत एक इस्लामी खलीफा स्थापित करना।''
उन्होंने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका साजिश के एक या अधिक पहलुओं से मेल खाती है।
अदालत ने पीएफआई के खिलाफ आरोप तय करने का भी आदेश दिया, और औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है।
यूएपीए की धारा 18 (षड्यंत्र) और 18बी (आतंकवादी कृत्य के लिए भर्ती करना) के प्रावधानों के अलावा, अदालत ने कई आरोपी व्यक्तियों और पीएफआई के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, सद्भाव बिगाड़ने वाले कृत्य करने, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने या उकसाने और इसी इरादे से हथियार जमा करने के अपराधों के लिए भी आरोप तय करने का निर्देश दिया।
आरोपियों में पीएफआई के अध्यक्ष ओ.एम.ए. सलाम, उपाध्यक्ष ई.एम. अब्दुल रहमान, महासचिव अनीस अहमद, सचिव अफसर पाशा और संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर शामिल हैं।
यह उल्लेख करते हुए कि ''हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) को समर्थन देने'' के संस्थागत निर्णय पीएफआई की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठकों में लिए गए, अदालत ने कहा कि ये कृत्य पदाधिकारियों के व्यक्तिगत कृत्य नहीं थे, बल्कि ये पीएफआई द्वारा किए गए कृत्य थे।
मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अप्रैल 2022 की प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसके बाद एजेंसी ने पीएफआई सहित 26 आरोपियों के खिलाफ अपनी अंतिम रिपोर्ट और एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। अदालत ने मार्च और अप्रैल 2023 में इन आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया था।
पिछले साल दिसंबर में, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने अदालत को सूचित किया था कि पीएफआई के नेता पड़ोसी देशों से हथियार हासिल करने और अपने कैडरों को हथियारों का प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रहे थे।
शुक्रवार को, त्यागी के अलावा, सहायक लोक अभियोजक विकास वालिया और जतिन खत्री, अधिवक्ता अमित रोहिल्ला और शुभम गोयल के साथ एनआईए की ओर से अदालत में पेश हुए।
सितंबर 2022 में, केंद्र ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत पीएफआई और इसके कई सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, तथा कहा था कि उनका आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ ''संबंध'' है।
भाषा
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