आशा भोसले के निधन से एक बार फिर सुर्खियों में आया बरेली का 'झुमका'
जितेंद्र
- 16 Apr 2026, 01:40 PM
- Updated: 01:40 PM
बरेली, 16 अप्रैल (भाषा) बरेली का प्रसिद्ध 'झुमका' एक बार फिर सुर्खियों में है और 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया त्यौहार से पहले इन पारंपरिक झुमकों की मांग में वृद्धि देखी जा रही है।
बरेली के झुमके को विश्व पटल पर लाने वाली मशहूर गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
वह 92 वर्ष की थीं।
अक्षय तृतीया त्यौहार से पहले इन पारंपरिक झुमकों की मांग में वृद्धि को लेकर बरेली के जौहरियों का कहना है कि महिलाओं ने इस शुभ अवसर के लिए झुमके खरीदना शुरू कर दिया है।
आर्टिफिशियल गहनों का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दिल्ली के थोक विक्रेताओं से नए माल की मांग की है।
स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि यह नई दिलचस्पी आशा भोसले के गाने 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में' की लगातार बनी रहने वाली लोकप्रियता के कारण उत्पन्न हुई है।
उनका कहना है कि यह गाना आज भी नई पीढ़ी के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।
यह गाना 1966 की फिल्म 'मेरा साया' का हिस्सा था और इसका संगीत मदन मोहन ने तैयार किया था।
इस गाने को अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया था।
इस गाने ने बरेली को एक विशेष सांस्कृतिक पहचान दी और भारत के साथ-साथ विदेशों में भी इसके गहनों के बाजारों को प्रसिद्ध करने में मदद की।
पर्यटन विभाग के उप निदेशक रविंद्र कुमार ने कहा, "यह गाना आज भी बरेली के सबसे मजबूत सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक है। इस गाने ने शहर को एक अनोखी पहचान दी है। इसी कारण अब बरेली को 'झुमका नगरी' के नाम से भी जाना जाता है।"
उन्होंने बताया कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अक्सर इस 'झुमके'और उससे जुड़ी कहानी के बारे में पूछते हैं।
कुमार ने कहा, "लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आखिर वह झुमका गिरा कहां था और उसके पीछे का इतिहास क्या है।"
जौहरी राज कुमार खंडेलवाल ने बताया कि आशा भोसले के निधन के बाद देशभर में इस क्षेत्र से जुड़े लोग झुमके में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "यह गाना एक बार फिर से चर्चा में आ गया है और लोग झुमकों के अलग-अलग डिजाइन के बारे में पूछ रहे हैं।"
खंडेलवाल ने यह भी बताया कि अनाज व्यापारियों ने भी अब इस तरह के डिजाइन वाले झुमकों की मांग करना शुरू कर दिया है।
बरेली के इज्जतनगर में 'रेल कैफे' चलाने वाले संजीव कुमार ने बताया कि यहां आने वाले लोग अक्सर 'झुमका बाजार' के बारे में पूछते हैं।
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव प्रतीक्षा हर्षित खंडेलवाल ने बताया कि बेंगलुरु में रहने वाली उनकी एक दोस्त ने भोसले के निधन के बाद हाल ही में वह मशहूर गाना सुना और अपने जन्मदिन पर बरेली का एक झुमका तोहफे में देने की इच्छा जताई।
उन्होंने कहा, "मैंने इस अक्षय तृतीया पर पहली बार झुमकों का एक सेट खरीदा है।"
बरेली महानगर बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने बताया कि 12 अप्रैल को भोसले के निधन की खबर आने के बाद से झुमकों की मांग में अचानक तेजी आई है।
उन्होंने कहा, "अक्षय तृतीया से पहले खरीदारी में काफी तेजी आई है। जहां स्थानीय लोग कम खरीदारी करते हैं, वहीं बाहर से आने वाले लोग झुमके खरीदना बिल्कुल नहीं भूलते।"
व्यापारियों ने बताया कि आर्य समाज गली जैसे इलाकों में आर्टिफिशियल गहनों के बाजार में रोजाना पांच से आठ लाख रुपये का कारोबार होता है। यहां झुमकों की कीमत 50 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक होती है, जबकि सोने के झुमके सोने के मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से बेचे जाते हैं।
भाषा सं सलीम जितेंद्र
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