संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए संख्या बल राजग सरकार के पक्ष में नहीं
माधव
- 16 Apr 2026, 05:44 PM
- Updated: 05:44 PM
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) संसद में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास आवश्यक संख्याबल नहीं है। हालांकि अन्य दलों के समर्थन हासिल करने से या उनमें से कुछ के मतदान से अनुपस्थित होने पर विधेयक का जरूरी मतों के साथ पारित होना संभव है।
लोकसभा में राजग को 293 सदस्यों का समर्थन है जो सदन का 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। सात सांसद निर्दलीय हैं, जबकि सात सांसद वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों से हैं, जिन्होंने अभी तक खुले रूप में विधेयकों का समर्थन नहीं किया है।
नियमों के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक सहित विधेयकों के समर्थन के लिए 360 सांसदों की आवश्यकता है, जो उपस्थित और मतदान करने वाले सांसदों की संख्या के दो-तिहाई के बराबर है।
विधेयकों को लोकसभा से मंजूरी मिलने के लिए, समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) या द्रमुक (22 सांसद) में से कम से कम दो मुख्य विपक्षी दलों को मतदान से अनुपस्थित रहना होगा। सदन में कांग्रेस के 98 सांसद हैं।
लोकसभा में भाजपा के 240 सांसद, तेदेपा के 16 और जद (यू) के 12 सांसद हैं। यदि विधेयकों को लोकसभा की मंजूरी नहीं मिलती है, तो उन्हें राज्यसभा में नहीं लाया जाएगा।
राज्यसभा में राजग के पक्ष में 141 सांसद हैं, जो सदन का 58 प्रतिशत है। वहीं विपक्ष के 83 सांसद हैं।
बीआरएस, वाईएसआरसीपी, बीजद और बसपा जैसे दलों और निर्दलीय सांसदों के सदन में 20 सांसद हैं और उनके समर्थन से फैसले पर असर पड़ सकता है।
राज्यसभा में भाजपा के 107 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के 28, तृणमूल कांग्रेस के 13, आम आदमी पार्टी के 10 और द्रमुक के आठ सांसद हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई भाजपा सांसदों ने निजी तौर पर स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।
संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है: कुल सदस्यों का बहुमत (50 प्रतिशत से अधिक) और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। इसलिए, यदि लोकसभा में वर्तमान में मौजूद सभी 540 सदस्य उपस्थित हों और मतदान करें, तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 मत चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की और कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने वाला संविधान (131वां संशोधन) विधेयक बृहस्पतिवार को मत विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया।
इसके साथ ही दो सामान्य विधेयक - परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए।
करीब 40 मिनट की तीखी बहस के बाद इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष ने संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने के लिए मत विभाजन की मांग की। 251 सदस्यों के समर्थन और 185 सदस्यों के विरोध के साथ विधेयक पेश किया गया।
भाषा अविनाश माधव
माधव
1604 1744 दिल्ली