मजबूत मानसिकता और निर्भीक रवैया ही सफलता की कुंजी: एशियाई चैंपियन पहलवान अभिमन्यु
मोना
- 18 Apr 2026, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) भारतीय पहलवान अभिमन्यु मांडवाल का कहना है कि आधुनिक युग की कुश्ती में मजबूत मानसिकता ही सब कुछ है और वह मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी निर्भीक रवैया है।
बचपन से ही निर्भीक रवैया उनके अंदर कूट-कूटकर भरा है और अब वह 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी में जुटे हैं जिसके लिए उन्होंने अपने पसंदीदा 74 किग्रा वर्ग में जाने का फैसला किया है।
इस युवा पहलवान ने हाल में बिश्केक में हुई एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर सफलता की ओर कदम बढ़ाया। स्वर्ण पदक तक पहुंचने के अपने सफर में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के दो पदक विजेताओं को हराया जिनमें 70 किग्रा फाइनल के उनके प्रतिद्वंद्वी मंगोलिया के टोमोर-ओचिरिन तुलगा भी शामिल थे।
जगरेब प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतने और हाल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 24 साल के इस पहलवान ने अंडर-23 से सीनियर सर्किट में जगह बना ली है। 2026 में मिली इस शुरुआती सफलता का श्रेय वह कुश्ती की गहरी समझ और मानसिक मजबूती को देते हैं।
मांडवाल ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''आपकी मानसिकता मजबूत होनी चाहिए। इसके बिना कुछ भी मुमकिन नहीं है। आप कितनी भी कड़ी ट्रेनिंग क्यों नहीं कर लें, अगर आपकी मानसिकता मजबूत नहीं है तो आप मुक़ाबला नहीं कर सकते। मैं अपने विरोधियों की चिंता नहीं करता। यही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है। ''
हरियाणा के इस पहलवान ने बताया कि उनका निर्भीक रवैया उनकी परवरिश से आया है। उनके पिता और चाचा दोनों ही पहलवान थे और वे उन्हें बिना किसी पुरस्कार की परवाह किए मुकाबलों में भेज देते थे।
मांडवाल ने कहा, ''वे बस मुझसे कहते थे कि जाओ, अखाड़े में खड़े हो जाओ और कुश्ती लड़ो। हमने कभी पैसे या स्तर के बारे में नहीं सोचा। इसी तरह मैं निडर बन गया। मैं किसी भी मुकाबले से पहले जरा भी नहीं हिचकिचाता। ''
भारत की पुरुषों की फ्रीस्टाइल टीम के मुख्य कोच विनोद कुमार भी इस बात से सहमत हैं। उन्होंने कहा, ''उसमें जबरदस्त इच्छाशक्ति है। ऐसे पहलवान आसानी से नहीं मिलते। वह मुश्किल मुकाबले भी जीत सकता है। मुझे उसकी यह बात सबसे ज्यादा पसंद है। हम उसे और भी बेहतर पहलवान बनाने के लिए सबकुछ करेंगे। भविष्य के बड़े टूर्नामेंट में वह जरूर अच्छा प्रदर्शन करेगा। ''
अब तक गैर ओलंपिक 70 किग्रा वर्ग में खेलने वाले मांडवाल का पूरा ध्यान अब 74 किग्रा वर्ग में जाने पर है। उनका मानना है कि यह वर्ग उनके शरीर और उनके लंबे समय के लक्ष्यों के लिए एकदम सही है जिनमें एशियाई खेल और ओलंपिक शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ''यही मेरा मुख्य लक्ष्य है। अगर मैं वहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो फिर इसका कोई मतलब नहीं है। मैं निश्चित रूप से 74 किग्रा वर्ग में खेलूंगा। यह मेरा पसंदीदा वजन वर्ग है। मेरा सामान्य वजन लगभग 74-75 किग्रा है। और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मैं इसे बढ़ाकर लगभग 78 किग्रा तक ले जाना चाहता हूं। ''
भाषा नमिता मोना
मोना
1804 1709 दिल्ली