नौसेना के पूर्व अधिकारी तिवारी एक अन्य मामले में कतर की जेल में बंद, छुड़ाने के प्रयास जारी : सूत्र
नेत्रपाल
- 18 Apr 2026, 07:31 PM
- Updated: 07:31 PM
नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) भारतीय नौसेना के एक पूर्व अधिकारी पुर्णेंदु तिवारी एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण कारागार में हैं। वह, उन आठ लोगों में शामिल हैं जिनकी सजा 2023 में कतर की अदालत ने कम कर दी थी। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने हालांकि तिवारी के परिवार द्वारा किए गए कुछ दावों को खारिज किया।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार पहले ही पूर्णेंदु तिवारी के क्षमादान का मुद्दा कतर सरकार के समक्ष उठा चुकी है और खाड़ी देश स्थित भारतीय दूतावास उनकी पत्नी के संपर्क में है तथा दूतावास के अधिकारियों ने जेल में उनसे कई बार मुलाकात की है।
तिवारी उन आठ पूर्व नौसेना कर्मियों में शामिल थे जिन्हें कतर के अधिकारियों ने 2022 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
कतर की अदालत द्वारा सजा कम किए जाने के फैसले के बाद अन्य सभी कर्मचारी भारत लौट आए, लेकिन तिवारी कतर में ही हैं। जानकारी के मुताबिक, तिवारी पर उनके पूर्व नियोक्ता, ओमान स्थित दहरा इंजीनियरिंग एंड सिक्योरिटी सर्विसेज की सहायक कंपनी से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है।
तिवारी की बहन मीतू भार्गव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार उनके भाई की वापसी सुनिश्चित करने में विफल रही। उन्होंने यहां तक कि दावा किया कि कतर के उच्च न्यायालय ने 12 मार्च को एक फैसले में उनके भाई पर लगे ''आरोपों को खारिज कर दिया'' और उन्हें ''निर्दोष'' घोषित किया।
इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ''मीतू भार्गव का यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। तिवारी को ओमानी मालिक और एक अन्य कतरी अधिकारी के साथ कतर की अदालत ने सजा सुनाई है।''
इसने कहा, ''यह फैसला फरवरी 2026 में आया था। 12 मार्च का फैसला एक अलग मामला है जो कंपनी के ओमानी मालिक द्वारा तिवारी के खिलाफ दायर किया गया था।''
सूत्र ने बताया कि सरकार ने तिवारी को हमेशा हरसंभव मदद दी है और आगे भी देती रहेगी।
इसने कहा, ''दूतावास तिवारी की पत्नी के संपर्क में है और हमारे अधिकारी उनसे जेल में कई बार मिल चुके हैं। हमने क्षमादान के लिए भी मामला उठाया है।''
सूत्रों ने बताया कि जिस मामले में तिवारी को सजा सुनाई गई है, वह उस मामले से अलग है जिसमें भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद उन्हें और अन्य को रिहा कर दिया गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में कहा, ''नौसेना के आठवें पूर्व अधिकारी के खिलाफ एक विशेष मामला दर्ज है। उन्हें उसी मामले में हिरासत में लिया गया है। इसका पहले वाले मामले से कोई लेना-देना नहीं है।''
भार्गव ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''कमांडर तिवारी नौसेना के सम्मानित अधिकारी हैं। बिना किसी गलती के ऐसे अधिकारी को जेल, अपमान और पीड़ा देना एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है।''
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल
1804 1931 दिल्ली