एनसीआर में 23 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित करेगा हरियाणा
अविनाश
- 24 Apr 2026, 06:03 PM
- Updated: 06:03 PM
चंडीगढ़, 24 अप्रैल (भाषा) हरियाणा सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 23 अतिरिक्त वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित करेगी, जिससे इस वर्ष जुलाई तक इनकी कुल संख्या 29 से बढ़कर 52 हो जाएगी।
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि राज्य सरकार परिवहन सेवाओं को विनियमित करने के लिए 'एग्रीगेटर नीति' भी लागू करेगी और अगले 11 महीनों में पुराने ठोस कचरे के निपटान का लक्ष्य रखा गया है।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी विभागों को तय समयसीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है।
रस्तोगी ने एनसीआर क्षेत्र के नगर निगम आयुक्तों तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरणों को अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम पांच प्रमुख सड़कों की पहचान कर उन्हें धूल-मुक्त मॉडल सड़कों के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने परिवहन, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने पर जोर देते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) से लेकर परियोजना पूर्ण होने तक सभी चरणों के लिए स्पष्ट समयसीमा के साथ व्यापक योजना तैयार करने को कहा।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) के अध्यक्ष जे. गणेशन ने कहा कि राज्य जुलाई तक वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का विस्तार 29 से बढ़ाकर 52 स्टेशन तक करेगा और इसके लिए निविदाएं मई के पहले सप्ताह में जारी की जाएंगी।
बोर्ड के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जिन 889 उद्योगों को सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) लगाने के निर्देश दिए गए थे, उनमें से 871 ने इसका अनुपालन कर लिया है और 735 उद्योग सक्रिय रूप से डेटा साझा कर रहे हैं। सभी बड़े और मध्यम उद्योगों को जुलाई के अंत तक प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को उन्नत करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि लघु उद्योगों को सितंबर के अंत तक यह कार्य पूरा करना होगा।
कृषि निदेशक राजनारायण ने बताया कि वर्ष 2016 से पराली जलाने के मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि 13,000 फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की कमी चिह्नित की गई है, जिसे आगामी धान कटाई सीजन से पहले पूरा किया जाएगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव) सुधीर राजपाल ने क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की सख्ती से जांच करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रदूषण मानकों के कड़ाई से अनुपालन और विशेष रूप से अधिक यातायात वाले मार्गों पर जांच अभियान तेज करने पर जोर देते हुए राजपाल ने चलती गाड़ियों से उत्सर्जन की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने और उसके आधार पर चालान जारी करने की आवश्यकता बताई।
परिवहन विभाग के प्रधान सचिव राजा शेखर वुंद्रू ने कहा कि विभाग जल्द ही कैब और राइड-शेयरिंग सेवाओं को विनियमित करने के लिए 'एग्रीगेटर' नीति लागू करेगा, जिससे निजी वाहनों के बड़े बेड़े को नियामक ढांचे के तहत लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुपालन में एनसीआर के प्रमुख जिलों से डीजल ऑटो-रिक्शा लगभग पूरी तरह हटाए जा चुके हैं और शेष क्षेत्रों में इन्हें इस वर्ष 31 दिसंबर तक चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
वुंद्रू ने 'नया सफर योजना' का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 1.9 लाख से अधिक पुराने ट्रकों और 16,000 बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को वित्तीय प्रोत्साहन के जरिए बढ़ावा दिया जा रहा है।
बयान के अनुसार, 31 मार्च 2027 तक पुराने ठोस कचरे का पूर्ण निपटान कर लिया जाएगा।
भाषा
राखी अविनाश
अविनाश
2404 1803 चंडीगढ़