महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर धामी का विपक्ष पर निशाना
खारी
- 24 Apr 2026, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
(फाइल बदलते हुए रिपीट)
देहरादून, 24 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा मनाए गए ''जश्न'' को देखकर उन्हें 'महाभारत' की याद आ गई।
यहां प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा परेड ग्राउंड से घंटाघर तक निकाली गई 'महिला जनाक्रोश पदयात्रा' में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा में संख्याबल के अभाव में जब यह विधेयक पारित नहीं हो सका, तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ऐसे जश्न मनाया, मानो वे कोई बड़ी जीत हासिल कर आए हों।
उन्होंने कहा, "यह दृश्य देखकर महाभारत की उस सभा की याद आई, जब कौरवों ने जोर-जोर से हंसते हुए एक अबला नारी का अपमान किया था। हमारी नारी शक्ति का अधिकार छीनकर कांग्रेस के युवराज दुर्योधन की तरह मदमस्त होकर जश्न मना रहे थे और समाजवादी पार्टी के नेताजी दुशासन की तरह महिलाओं का अपमान कर खुद को विजयी मान रहे थे।"
धामी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री महिलाओं को 2029 से लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकार दिलाने के उद्देश्य से यह संशोधन विधेयक लाए थे, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) के दलों ने मिलकर एक "ऐतिहासिक और युग-परिवर्तनकारी निर्णय" को अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण बाधित कर दिया।
उन्होंने कहा कि इन दलों को डर है कि अगर सामान्य परिवारों की महिलाएं राजनीति में आएंगी और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी करेंगी, तो परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया, ''इसीलिए इस परिवारवादी सिंडिकेट ने एकजुट होकर हमारी नारी शक्ति के अधिकारों को कुचलने का षडयंत्र रचा।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस के शासन के बावजूद महिलाओं को उनका पूरा हक नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल तक मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या बहुत सीमित रही।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पहली महिला प्रधानमंत्री देने का दावा करती है, लेकिन वह किसी सामान्य परिवार से नहीं थीं।
धामी ने कहा, "अगर वह (इंदिरा गांधी) नेहरूजी की बेटी न होतीं तो कांग्रेस कभी उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाती।''
धामी ने प्रियंका गांधी के नारे "मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं" का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़े होने का अवसर आया, तो उन्होंने साथ नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री ने महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जिनमें 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', 'उज्ज्वला योजना' और 'जनधन योजना' शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिलचिलाती धूप में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि उत्तराखंड से उठी यह आवाज पूरे देश में गूंजेगी।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे उनके अधिकारों में बाधा बनने वाली परिवारवादी दलों को आने वाले चुनावों में करारा जवाब दें।
भाषा दीप्ति खारी
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2404 2022 देहरादून