कांग्रेस ने महिलाओं के हक की चोरी की, देश की आधी आबादी उसे माफ नहीं करेगी: मुख्यमंत्री यादव
शोभना
- 28 Apr 2026, 12:13 AM
- Updated: 12:13 AM
भोपाल, 27 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संविधान संशोधन के जरिए महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई लेकिन कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने उनके हक की चोरी की और इसके लिए देश की आधी आबादी उन्हें माफ नहीं करेगी।
उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस की मौजूदा स्थिति में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग को चुनौती देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कोई भी परिसीमन के संशोधन के बिना पास नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री यादव, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री के जवाब के बाद यह संकल्प पारित हो गया। हालांकि इससे ठीक पहले कांग्रेस के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।
इससे पहले, सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर कांग्रेस ने पार्टी की ओर से पेश महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग वाले एक निजी विधेयक पर पहले चर्चा कराने की मांग की लेकिन अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इसे अस्वीकार कर दिया।
इसके विरोध में कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। हालांकि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सरकारी संकल्प ध्वनिमत से पारित हो गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे ही परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने का सरकार का संकल्प पेश करने के लिए खड़े हुए, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया।
सिंघार ने कहा कि कांग्रेस 2023 में संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण अधिनियम पर तत्काल चर्चा और उसे लागू करना चाहती है। विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे सदन के नेता को प्रस्ताव पेश करने की अनुमति देने का आग्रह किया और कहा कि इसके बाद वह अपना फैसला सुनाएंगे।
कांग्रेस सदस्यों ने जोर देकर कहा कि उनके निजी विधेयक को समय पर प्रस्तुत किया गया है, इसलिए इस पर चर्चा की जानी चाहिए।
सिंघार ने कहा कि अगर नीयत साफ है तो 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए तथा सरकार को परिसीमन का इंतजार नहीं करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने संकल्प में चर्चा के दौरान कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आधी आबादी का आरक्षण रोककर कांग्रेस ने उनका गला घोटा और पाप किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नकारात्मकता ऐसी रही है कि वह पक्ष में और विपक्ष में रहते हुए महिला आरक्षण का विरोध करती रही है।
उन्होंने कहा, " कांग्रेसी गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। इससे तो गिरगिट भी शरमा जाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कोई भी परिसीमन के संशोधन के बिना पास नहीं कर सकता है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को नींद से जागना चाहिए और महिलाओं के साथ अन्याय बंद करना चाहिए।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के कहा कि सरकार की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर है।
उन्होंने सरकार से महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब महिलाओं की आबादी लगभग आधी है, तो उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण देने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी पूछा कि महिला आरक्षण कब लागू होगा और परिसीमन कब किया जाएगा? सिंघार ने कहा कि सरकार 2029 और 2047 की बात करती है, लेकिन मध्यप्रदेश की महिलाओं के वर्तमान अधिकारों पर मौन है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि 2023 के कानून में स्पष्ट रूप से जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी, जिसका कांग्रेस ने समर्थन किया था, लेकिन अब इसे बदलने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती है और इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरा समर्थन देगी। यह विषय राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
सिंघार ने कहा कि महिलाओं की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक है और कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाती रहेगी। सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने के कुछ देर बाद जब कांग्रेस ने सरकार के संकल्प का विरोध किया तो संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा के वरिष्ठ विधायक सीताशरण शर्मा ने तर्क दिया कि नियमों और परंपरा के तहत एक सरकारी संकल्प को निजी विधेयक पर प्राथमिकता दी जाती है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने सिंघार का समर्थन किया, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
व्यवस्था बहाल होने के बाद अध्यक्ष ने सरकारी संकल्प पर विचार करने के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। बाद में विपक्ष ने विधानसभा परिसर में नारेबाजी की। लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे।
विधेयक में 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की कवायद के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव किया गया था।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
भाषा ब्रजेन्द्र शोभना
शोभना
2804 0013 भोपाल