साहित्यिक चोरी संबंधी कानूनी लड़ाई पर सुजॉय ने कहा: इसे हल्के में लेना मुझे भारी पड़ा
माधव
- 29 Apr 2026, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
मुंबई, 29 अप्रैल (भाषा) फिल्मकार सुजॉय घोष ने 2016 की अपनी फिल्म 'कहानी 2: दुर्गा रानी सिंह' को लेकर कानूनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात की है और कहा है कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि साहित्यिक चोरी की शिकायत एक दशक लंबे आपराधिक मामले में बदल जाएगी।
उन्होंने साथी रचनाकारों से अपील की कि वे इस तरह के खतरों को शुरू से ही गंभीरता से लें।
'स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन' (एसडब्ल्यूए) द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में घोष ने याद किया कि अभिनेत्री विद्या बालन अभिनीत इस फिल्म की रिलीज होने के शीघ्र बाद विवाद कैसे शुरू हुआ। फिल्मकार के अनुसार फिल्म के लेखक रॉबिन भट्ट ने उन्हें बताया कि एक व्यक्ति ने पटकथा की नकल करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने इस दावे को निराधार बताया लेकिन उनका यही लापरवाहपूर्ण रवैया महंगा साबित हुआ।
उन्होंने कहा, ''यह ऐसा था जैसे कोई कहे,'तुमने उस व्यक्ति को मार डाला', मैंने कहा, 'मैंने नहीं मारा' और मुझे इसे गंभीरता से क्यों लेना चाहिए।' यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। अचानक, मेरे खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो गया क्योंकि हमारे देश में बौद्धिक संपदा अधिकार एक आपराधिक मामला है।''
घोष ने कहा, ''तो, अगर मैं आप पर (साहित्यिक चोरी का) आरोप लगाता हूं, तो आप मेरे खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सकते हैं। यह अचानक हुआ। शुरू में मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यह एक धीमी आग की तरह है, जो धीरे-धीरे गति पकड़ती है और लड़ाई बड़ी होती जाती है और इससे पहले कि आपको पता चले, यह आप तक पहुंच जाती है।''
पटकथा लेखन समुदाय के भीतर के विवादों पर स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने यह परिचर्चा आयोजित की थी।
पिछले महीने, शीर्ष अदालत ने फिल्म 'कहानी 2' को लेकर घोष के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप वाले एक मामले की कार्यवाही रद्द कर दी और कहा कि शिकायत में केवल 'बेबुनियाद आरोप' हैं।
शिकायतकर्ता उमेश प्रसाद मेहता ने फिल्म 'सबक' की पटकथा लिखी थी और आरोप लगाया था कि घोष ने उनकी पटकथा चुराकर उनके कॉपीराइट का उल्लंघन किया एवं 'कहानी 2' बनाई, जो उनकी 2012 की हिट फिल्म 'कहानी' का सीक्वल थी। दोनों में बालन मुख्य भूमिका में थीं।
लंबे कानूनी लड़ाई को 'डरावना' बताते हुए, घोष ने कहा कि स्थिति तब और भी जटिल हो गई जब लेखक ने कई दावे किए, जिनमें उनके साथ कथित मुलाकातों का दावा भी शामिल था। उन्होंने कहा कि हैं कि ऐसा कभी हुआ ही नहीं।
घोष ने अपने मामले में मदद के लिए एसडब्ल्यूए की विवाद निपटान समिति को श्रेय दिया, जिसने दोनों पटकथाओं की समीक्षा की और उनके बीच कोई संबंध नहीं पाया।
घोष ने साथी लेखकों और फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया कि वे इस तरह के आरोपों को शुरू से ही गंभीरता से लें।
भाषा राजकुमार माधव
माधव
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