एएसआई संरक्षित भोजशाला में पूजा-इबादत पर शीर्ष अदालत को फैसला करना है:दिग्विजय सिंह
राजकुमार
- 15 May 2026, 11:52 PM
- Updated: 11:52 PM
इंदौर, 15 मई (भाषा) कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद शुक्रवार को कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षित इस विवादित स्मारक में पूजा या इबादत की अनुमति के मामले में अब शीर्ष अदालत को फैसला करना है।
उन्होंने यह बात ऐसे वक्त कही, जब मुस्लिम पक्ष ने घोषणा की है कि स्मारक को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर करार दिए जाने के फैसले को वह उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा।
सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा,"भोजशाला एएसआई संरक्षित स्मारक है। हम भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन करेंगे।"
सिंह का कहना था कि वह हमेशा से कहते रहे हैं कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति को हर हालत में भारत वापस लाया जाना चाहिए और इस दिशा में पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने भी प्रयास किए थे।
उन्होंने कहा,"....लेकिन भारत वापस आने के बाद यह मूर्ति कहां स्थापित हो, इस बारे में मैंने कुछ भी नहीं कहा है। भोजशाला एएसआई संरक्षित स्मारक है और क्या ऐसे स्मारक के अंदर पूजा या इबादत हो सकती है, यह शीर्ष अदालत को तय करना है।"
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि यह अध्ययन की बात है कि भोजशाला परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस मूर्ति का कोई उल्लेख नहीं है।
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि विवादित परिसरों से जुड़े विषयों में नियम-कानूनों का पालन किया जाना चाहिए और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, संभल की शाही जामा मस्जिद तथा मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े मुकदमे उच्चतम न्यायालय में पहले से लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि देश इस समय 'आर्थिक और सामाजिक संकट' से गुजर रहा है और ऐसे समय 'हिंदू-मुसलमान' के मुद्दे उठाना उचित नहीं है।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को 'बहुत बड़ा घोटाला' करार देते हुए सिंह ने कहा कि वह संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं और समिति ने 2024 की अपनी रिपोर्ट में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार को विस्तृत सुझाव दिए थे।
उन्होंने कहा,"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री से तत्काल इस्तीफा ले लेना चाहिए और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अध्यक्ष को बर्खास्त कर देना चाहिए।"
भाषा हर्ष राजकुमार
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