भारत 2060 तक वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी में चीन को पछाड़ देगा : रिपोर्ट
अजय
- 05 Jun 2026, 03:23 PM
- Updated: 03:23 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) भारत वर्ष 2060 के आसपास क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है जबकि सदी के उत्तरार्द्ध में चीन की हिस्सेदारी घटने की संभावना है। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया।
क्रय शक्ति समता (पीपीपी) उन कुल वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा को मापती है, जिसे किसी देश की मुद्रा की एक इकाई दूसरे देश में खरीद सकती है।
इस रिपोर्ट को शोध संस्थान 'वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब' (डब्ल्यूआईएल) से जुड़े शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। पेरिस स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स (पीएसई) में स्थित डब्ल्यूआईएल वैश्विक असमानताओं के अध्ययन पर काम करता है।
रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान में चीन की पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अमेरिका की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक है। इसमें वर्ष 2035 तक चीन की अर्थव्यवस्था के अमेरिका से लगभग दोगुनी होने का अनुमान भी जताया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की जनसंख्या हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। वर्ष 1945 में जहां यह दुनिया की जनसंख्या का लगभग 23 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह घटकर करीब 17 प्रतिशत रह गई है और वर्ष 2100 तक इसके आठ प्रतिशत से भी कम रह जाने का अनुमान है।
रिपोर्ट कहती है, ''इसी वजह से 21वीं सदी के दूसरे हिस्से में चीन की वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी स्थिर होने के बाद घटने का अनुमान है। लगभग वर्ष 2060 तक भारत के चीन को पीछे छोड़ देने की संभावना है।''
इसके मुताबिक, इस बात की संभावना बहुत कम है कि चीन कभी उस तरह का वैश्विक प्रभुत्व हासिल कर सकता है जैसा अमेरिका ने लगभग 1950 के आसपास या यूरोप ने 1900–1910 के बीच हासिल किया था। इसके चलते भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था के बहुध्रुवीय बने रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत में असमानता चीन की तुलना में कहीं अधिक है, लेकिन उत्पादकता वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। मानव पूंजी में चीन के अधिक और बेहतर निवेश को इसका कारण बताया गया है।
नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य के मुताबिक, वर्ष 2026 में भारत का जीडीपी 4.15 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है जबकि ब्रिटेन का जीडीपी 4.27 लाख करोड़ डॉलर और जापान का 4.38 लाख करोड़ डॉलर रह सकता है।
अमेरिका 32.38 लाख करोड़ डॉलर के साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, जबकि चीन 20.85 लाख करोड़ डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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