सेना का पूर्व जवान ट्रक चालक की हत्या के 33 साल पुराने मामले में गिरफ्तार
माधव
- 05 Jun 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने तांबे से लदे ट्रक को लूटने और वाहन चालक की हत्या करने के 33 साल पुराने मामले में सेना के पूर्व जवान को गिरफ्तार किया है। वह घटना के बाद से ही फरार था। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उनके मुताबिक, आरोपी 1984 में सेना में शामिल हुआ था, लेकिन बाद में उसे कोर्ट मार्शल कर बर्खास्त कर दिया गया था।
आरोपी की पहचान राजेंद्र डागर (59) के तौर पर हुई है और वह 1993 से फरार था और 1994 में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। उसे एक जून को गिरफ्तार किया गया।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) संजीव कुमार यादव ने एक बयान में कहा, "पिछले 33 वर्षों से वह लगातार कई राज्यों में अपनी पहचान, हूलिया और ठिकाने बदलता रहा।"
उन्होंने कहा, "डिजिटल रिकॉर्ड, आधुनिक निगरानी उपकरणों और 1990 के दशक की शुरुआत के मूल मामले के दस्तावेजों की अनुपस्थिति के बावजूद टीमों ने भगोड़े का पता लगा लिया।"
यह मामला 15 जून 1993 का है, जब राजस्थान के झुंझुनू के रहने वाले ट्रक चालक राम सिंह की पुरानी दिल्ली के लाहौरी गेट इलाके के एक होटल में कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, राजेंद्र और उसके साथियों ने राम सिंह को कथित तौर पर जहर देकर कंपनी से संबंधित तांबे की खेप ले जा रहे उसके ट्रक को चुरा लिया।
बयान में बताया गया है कि राजेंद्र ने राम सिंह को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह उसके मार्ग और उसके द्वारा ले जाए जा रहे माल की प्रकृति से अवगत था।
इस बाबत 17 जून 1993 को लाहौरी गेट थाने में दर्ज की गई थी। वारदात के बाद से आरोपी फरार था।
डीसीपी ने बताया कि राम आरोपी ने कथित अपराध किया था तब वह 25 साल का था और अब वह 59 साल का है।
उन्होंने बताया कि न्यायिक अभिलेखों की विस्तृत जांच से पता चला कि राजेंद्र कथित तौर पर अतीत में भी इसी तरह के अपराधों में शामिल रहा था।
डीसीपी ने बताया, "इसके बाद टीम ने राजस्थान के झुंझुनू में आरोपी के पैतृक गांव पर ध्यान केंद्रित किया। अधिकारियों ने सावधानीपूर्वक उसके परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई और कई महीनों तक बार-बार दौरे किए।"
उनके मुताबिक, जांच से पता चला कि राजेंद्र जीवित था और अक्सर अपने गांव आता-जाता रहता है, लेकिन वह बेहद सतर्क रहता है और लंबे समय तक वहां रुकने से बचता है।
सफलता तब मिली जब निगरानी के दौरान एक संदिग्ध मोबाइल फोन नंबर सामने आया।
अधिकारी ने बताया कि यह नंबर ज्यादातर समय बंद रहता था, लेकिन जब भी यह सक्रिय होता था, तो इसकी लोकेशन अलग-अलग शहरों के विभिन्न होटलों और अतिथि गृहों की होती थी। इस पैटर्न से पता चलता है कि राजेंद्र अक्सर अपना ठिकाना बदलता रहता था।
उन्होंने कहा, "एक विशिष्ट सूचना के आधार पर, टीम हरियाणा के नारनौल पहुंची। पुलिस ने इलाके के लगभग 15 होटलों और अतिथि गृह की तलाशी ली और अंततः आरोपी को एक ऐसे प्रतिष्ठान में ढूंढ निकाला, जहां वह कथित तौर पर फर्जी पहचान के तहत रह रहा था।"
इससे पहले दिल्ली के कश्मीरी गेट और मायापुरी के साथ-साथ राजस्थान के अलवर के पुलिस थानों में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
भाषा नोमान नोमान माधव
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