ऊर्जा, ईंधन और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी: राजनाथ सिंह
धीरज
- 06 Jun 2026, 12:33 AM
- Updated: 12:33 AM
लखनऊ, पांच जून (भाषा) रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' में स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल का हवाला देते हुए ऊर्जा, ईंधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर दिया।
सिंह ने कहा, "पिछले साल पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में कायरतापूर्ण हमले के बाद हमारे तीनों सशस्त्र बलों ने संयुक्त रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। हमने पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए सटीक हमले किए। हमने आतंकवादियों और उनके संरक्षक दोनों का सफाया कर दिया।"
उन्होंने कहा, "हम इसे हासिल करने में सक्षम थे क्योंकि हमारा मनोबल ऊंचा था। हमारे पास स्वदेशी हथियार थे और हम अन्य देशों पर निर्भर नहीं थे। हमें ऊर्जा, ईंधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में समान क्षमता (आत्मनिर्भरता) हासिल करनी होगी और मुझे विश्वास है कि हम इसे हासिल करेंगे।''
केंद्रीय मंत्री विश्व पर्यावरण दिवस पर लखनऊ में 'बाययुग' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी पहल केवल स्वच्छता के बारे में नहीं हैं, ऐसे प्रयासों से हमारे सशस्त्र बलों का मनोबल भी बढ़ता है।
सिंह ने कहा, "जब हमारे छावनी क्षेत्र साफ-सुथरे होते हैं, तो बीमारियां कम होती हैं, जिससे समृद्धि आती है और हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ता है। ऑपरेशन सिंदूर इस बढ़े हुए मनोबल का एक उदाहरण है।"
उन्होंने कहा कि आज भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जा रहा है और ये एथनॉल गन्ने और फसलों से यहीं तैयार होता है।
उन्होंने कहा, "जब पश्चिम एशिया में संकट आया और तेल की कीमतें आसमान छू गईं, तो इससे वैश्विक उथल-पुथल मच गई। हालांकि, भारत उस झटके को अपेक्षाकृत अच्छी तरह से झेलने में सक्षम था क्योंकि हमने अपने ईंधन का 20 प्रतिशत एथनॉल घरेलू स्तर पर उत्पादित किया था।"
रक्षामंत्री ने कहा कि जैव ईंधन न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रहा है बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक शक्तिशाली उपकरण भी बन रहा है।
उन्होंने कहा, "हमें अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी चाहिए। हमें अपनी घरेलू क्षमता बनाने और स्वदेशी संसाधनों से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थापित करने की जरूरत है। हमें अपनी जमीन, किसानों, संसाधनों और वैज्ञानिक प्रतिभा से विकल्प तैयार करने होंगे जो संकट के समय भी हमारी अर्थव्यवस्था को जारी रखें।"
सिंह ने कहा, "हम अपने पर्यावरणीय दायित्वों को पूरा करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकते हैं। यही 'आत्मनिर्भरता' हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में मजबूत रखती है।"
सिंह ने प्लास्टिक को एक आवश्यक बुराई बताते हुए कहा, " प्लास्टिक एक आवश्यक बुराई है। समय की मांग है कि इस आवश्यक बुराई के 'बुरे' पहलू को दूर किया जाए और इसे प्रकृति के अनुकूल बनाया जाए।"
उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश बदल गया है और 'बाहुबली युग' से आगे बढ़ते हुए, आज चर्चा 'बायोयुग' (जैव युग) को लेकर है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "उत्तर प्रदेश आज बदल गया है। गन्ने के समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। 'बाहुबली युग' से आगे बढ़ते हुए, आज चर्चा 'बायोयुग' (जैव युग) के बारे में है। यह परिवर्तन हमारे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत नेतृत्व में मजबूत 'डबल इंजन' सरकार का परिणाम है।"
छावनी बोर्ड के संबंध में राजनाथ सिंह ने कहा, "अगर मैं छावनी बोर्ड या रक्षा संपदा के बारे में बात करता हूं, तो हम सभी जानते हैं कि उनका दायरा कितना विशाल और महत्वपूर्ण है। इसे केवल इस तथ्य से समझा जा सकता है कि, आज, हमारी रक्षा संपदा लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि का प्रबंधन करती है। मुझे लगता है कि यह कोई सामान्य जिम्मेदारी नहीं है; यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।''
उन्होंने कहा, ''ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी रक्षा भूमि महज जमीन के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि वे हमारे रक्षा तंत्र की नींव बनाती हैं। इसके अलावा, हमारे छावनी बोर्ड सुशासन का उदाहरण स्थापित कर रहे हैं।"
भाषा अरूणव जफर धीरज
धीरज
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