मुझे लगता है कि यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत है, नार्वे शतरंज में जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा
सुधीर
- 06 Jun 2026, 12:56 PM
- Updated: 12:56 PM
ओस्लो, छह जून (भाषा) भारत के स्टार आर प्रज्ञानानंदा ने नार्वे शतरंज में जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि महान खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन सहित दुनिया के कुछ सबसे मजबूत खिलाड़ियों को हराने से यह खिताब और भी यादगार बन गया है।
उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का स्तर बहुत ऊंचा था और औसत रेटिंग भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक थी जिससे उनकी जीत का महत्व और बढ़ गया।
प्रज्ञानानंदा 2013 में शुरू हुए नार्वे शतरंज टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। उन्होंने दुनिया के नंबर एक और सात बार के चैंपियन कार्लसन को दो बार हराकर शानदार प्रदर्शन किया।
प्रज्ञानानंदा ने कड़े मुकाबले में खिताब जीता क्योंकि ओपन वर्ग के सभी छह खिलाड़ियों की रेटिंग 2700 से ऊपर थी और कार्लसन 2840 रेटिंग के साथ शीर्ष खिलाड़ी थे जिससे इस खिताब की अहमियत और बढ़ गई।
विन्सेंट कीमर के खिलाफ आखिरी दौर में जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत है। औसत रेटिंग के मामले में भी यह अधिक मजबूत है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि विज्क आन जी (टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट) में कुछ खिलाड़ी 2600 रेटिंग वाले होते हैं लेकिन यहां सिर्फ शीर्ष खिलाड़ी हैं।''
कीमर को हराने के बाद प्रज्ञानानंदा के 18 अंक हो गए और उन्होंने अमेरिका के वेस्ली सो और फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा को पछाड़कर खिताब जीता।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''इसे जीतना अधिक खास है और इसमें यह बात भी जुड़ जाती है कि मैग्नस वहां थे। साथ ही लगातार चार बाजी जीतना भी।''
उनकी पिछली सबसे बड़ी जीत नीदरलैंड के विज्क आन जी में 2025 टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट में आई थी।
भले ही प्रज्ञानानंदा का पूरा ध्यान कीमर के खिलाफ मुकाबले पर था लेकिन कभी-कभी उनका ध्यान दूसरे बोर्ड की ओर भी चला जाता होगा जहाँ सो का मुकाबला अलीरेजा से हो रहा था। अगर सो क्लासिकल बाजी जीत जाते तो प्रज्ञानानंदा खिताब से चूक जाते। उस मुकाबले का ड्रॉ नतीजा निर्णायक साबित हुआ और मैच टाईब्रेक में चला गया जहां सो ने जीत दर्ज की लेकिन उन्हें तीन की जगह सिर्फ डेढ़ अंक मिले।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मैं खुश था कि वह मैच (सो बनाम अलीरेजा) ड्रॉ रहा... मुझे बस जीतना था और मुझे (कीमर के खिलाफ) जीतना ही था।''
प्रज्ञानानंदा ने कहा कि टूर्नामेंट में शुरुआती झटकों के बाद भी उनके खेलने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया जिससे उन्हें लगातार चार जीत मिली और वे खिताब जीतने में सफल रहे।
उन्होंने कहा कि एक अहम बदलाव यह था कि उन्होंने जानबूझकर 'टाइम ट्रबल' (समय की कमी) से बचने और पूरे टूर्नामेंट के दौरान तेजी लेकिन संयम के साथ शतरंज खेलने की कोशिश की।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ खास बदलाव किया लेकिन तेजी से खेलने की इस कोशिश से निश्चित रूप से मेरे खेल में मदद मिली। अधिक मुकाबलों में मेरे पास अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अधिक समय था।''
इस युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि वे अपने कार्यक्रम और काम के बोझ को बेहतर ढंग से संभालने के लिए पिछले साल की तुलना में कम टूर्नामेंट खेलने की योजना बना रहे हैं। हालांकि उन्होंने पुष्टि की कि वे हांगकांग में 16-22 जून तक होने वाली 'विश्व रेपिड टीम चैंपियनशिप' में 'चेस गुरुकुल' की ओर से हिस्सा लेंगे।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''यहां खेलने वाले अधिकतर खिलाड़ी वहां (विश्व रेपिड और ब्लिट्ज टीम के लिए) भी होंगे और यह 10 दिन में शुरू होने वाला है। लेकिन अभी के लिए मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ समय के लिए शतरंज के बारे में सोचूंगा।''
एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने पर उन्होंने कहा, ''(कार्लसन के खिलाफ) जीत ने टूर्नामेंट जीतने में मदद की इसलिए हर अंक मायने रखता है। हां, मैं कुल मिलाकर खुश हूं कि मैं (खराब शुरुआत के बाद) इस तरह वापसी कर पाया। मेरे लिए यह अधिक खास है कि मैंने टूर्नामेंट जीता, विशेषकर तब जब मैग्नस वहां मौजूद थे।''
भाषा सुधीर
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