शादी के लिए रिश्ते कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का मास्टमाइंड ग्वालियर से गिरफ्तार
रंजन
- 12 Jun 2026, 08:32 PM
- Updated: 08:32 PM
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) सोशल मीडिया पर शादी के लिए रिश्ते कराने का विज्ञापन देकर विभिन्न राज्यों के लोगों से कथित ठगी करने वाले गिरोह के 'मास्टरमाइंड' को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
शाहदरा जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि आरोपी प्रदीप साहू (30) को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया है और वह छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा का रहने वाला है।
उन्होंने बताया कि वह धोखाधड़ी करने के लिए कई शहरों में कॉल सेंटरों का एक नेटवर्क भी चलाता था।
उन्होंने बताया कि आरोपी शादी के लिए रिश्ते कराने के नाम पर पंजीकरण शुल्क, सत्यापन शुल्क और अन्य तरह के शुल्कों के माध्यम से लोगों से ठगी करता था।
दिल्ली के पूर्वी आज़ाद नगर के निवासी की शिकायत के बाद अक्टूबर 2025 में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, सोशल मीडिया पर शादी के लिए रिश्ते कराने से जुड़ी सेवाओं का विज्ञापन देखने के बाद उसने उन लोगों से संपर्क किया।
पुलिस ने बताया कि उन पर भरोसा करके उसने ठगों के दिए क्यूआर कोड के ज़रिए करीब 81,000 रुपये स्थानांतरित किए, और बाद में उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
डीसीपी ने बताया कि जांच के दौरान, पुलिस ने पता लगाया कि धोखाधड़ी से लिए गए पैसे शालिनी शिवरे नाम की महिला के बैंक खाते में गए हैं। आगे की जांच में जांचकर्ताओं को ग्वालियर में राजकुमारी नाम की महिला द्वारा चलाए जा रहे एक कॉल सेंटर का पता चला।
मीणा के मुताबिक, राजकुमारी ने पुलिस को बताया कि प्रदीप साहू कॉल सेंटर का असली मालिक और संचालक है। वह इसका संचालन "रिश्ते गाइड सर्विसेज़" के नाम से करता था।
प्रदीप ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह लगभग पांच वर्षों से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था और उसने ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आज़मगढ़ में लगभग 14 कॉल सेंटर स्थापित किए थे।
डीसीपी ने बताया कि आरोपी ने विज्ञापनों के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की और उन्हें शादी के लिए रिश्ते चाहने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए प्रशिक्षित किया।
उन्होंने कहा कि गिरोह आमतौर पर पीड़ितों से अपेक्षाकृत कम रकम, 5,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच एकत्र करते थे, क्योंकि इस बात की संभावना कम होती थी कि लोग कम राशि के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।
पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान बरामद किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सबूतों से ठगी के पैमाने के बारे में अहम सुराग मिले हैं। पुलिस को अबतक आठ लेनदेन में गिरोह की संलिप्तता का पता चला है।
भाषा नोमान नोमान रंजन
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