टीवी से रेडियो तक, केंद्र ने प्रसारण सेवाओं के लिए समान नियमों का प्रस्ताव रखा
माधव
- 12 Jun 2026, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने टेलीविजन और रेडियो प्रसारण सेवाओं के लिए एक समान नियामक ढांचे का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ''राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक प्रासंगिकता वाले विषयों'' पर कार्यक्रम प्रसारित करने की ज़िम्मेदारी को टीवी चैनल से आगे बढ़ाकर निजी रेडियो सेवाओं पर भी लागू किया जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को सार्वजनिक किए गए दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 के मसौदे में कहा गया है कि टीवी चैनल को सुबह छह बजे से रात 11 बजे के बीच प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक इन विषयों से संबंधित सामग्री प्रसारित करनी होगी। वहीं, रेडियो स्टेशन को इसके लिए हर दिन एक घंटे का समय निर्धारित करना होगा।
टीवी चैनल के लिए इस तरह की सामग्री का प्रसारण चार वर्ष पहले 'भारत में टेलीविजन चैनल के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशानिर्देश, 2022' के तहत अनिवार्य किया गया था, लेकिन नियमों में इसके लिए कोई निश्चित समयावधि निर्धारित नहीं की गई थी। नया मसौदा इस कमी को दूर करने का प्रयास करता है।
इसके अलावा, एफएम नीति के तीसरे चरण के तहत, निजी रेडियो स्टेशन को केंद्र सरकार या राज्य सरकार की ज़रूरत के अनुसार अब तक हर दिन एक घंटे के लिए ''जनहित की घोषणाएं'' प्रसारित करनी होती थीं।
हालांकि, मसौदा नियमों में कहा गया है कि प्रत्येक अधिकृत निजी रेडियो सेवा को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर आधारित कार्यक्रमों का प्रतिदिन कम से कम एक घंटे तक प्रसारण करना होगा। इससे उन जनहित कार्यक्रमों और घोषणाओं की प्रकृति अधिक स्पष्ट हो जाएगी, जिनका प्रसारण निजी रेडियो स्टेशनों से अपेक्षित होगा।
इसके अलावा, जहां मौजूदा दिशानिर्देशों में कहा गया है कि टीवी चैनल जनसेवा प्रसारण कर सकते हैं, वहीं मसौदा नियमों में इसे बदलकर करना होगा का प्रस्ताव है। इससे इस दायित्व को अधिक स्पष्ट और अनिवार्य बनाया जाएगा।
मौजूदा नियमों में सुझाए गए विषयों शिक्षा और साक्षरता का प्रसार, कृषि एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, महिला कल्याण, समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान, पर्यावरण तथा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को मसौदा नियमों में भी यथावत रखा गया है।
मसौदा नियमों में कहा गया है कि यह अनिवार्यता कुछ ऐसी श्रेणियों पर लागू नहीं होगी, जहां इन प्रावधानों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
भाषा आशीष माधव
माधव
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