कोझिकोड में निपाह निगरानी के तहत तीन लोग अस्पताल में भर्ती, अब तक कोई नया मामला नहीं
माधव
- 12 Jun 2026, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
कोझिकोड, 12 जून (भाषा) केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने शुक्रवार को कहा कि कोझिकोड जिले में निपाह वायरस की निगरानी के तहत पृथकवास में रखे गए तीन लोगों को चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के विशेषज्ञों का एक दल शनिवार को जिले का दौरा करेगा और स्थिति का आकलन करने के साथ रोकथाम उपायों की समीक्षा भी करेगा।
उन्होंने कहा कि जिले में अब तक निपाह संक्रमण का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
मुरलीधरन ने कहा, ''वर्तमान में निपाह संक्रमण का उपचार करा रहे मरीज को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों तथा चिकित्सा बोर्ड की सिफारिश के अनुसार मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी की पहली खुराक दी गई है।''
उन्होंने बताया कि संपर्क सूची में 10 और लोगों को शामिल किया गया है, जिससे निगरानी में रखे गए संपर्कों की कुल संख्या बढ़कर 87 हो गई है।
मंत्री के अनुसार, इनमें से चार लोग अत्यधिक जोखिम श्रेणी, 16 उच्च जोखिम श्रेणी और 67 निम्न जोखिम श्रेणी में हैं।
उन्होंने कहा कि संपर्क सूची में शामिल सभी लोगों की नियंत्रण कक्ष द्वारा दिन में दो बार फोन कॉल कर निगरानी की जा रही है।
मंत्री ने बताया, ''एहतियाती उपायों के तहत स्वास्थ्यकर्मियों ने रामनाट्टुकारा नगर पालिका के वार्ड-5 में 286 घरों का सर्वेक्षण किया, जहां निपाह संक्रमण का मामला सामने आया था। इस दौरान बुखार से पीड़ित 12 लोगों की पहचान की गई, लेकिन उनमें से किसी में भी निपाह संक्रमण से जुड़े लक्षण नहीं पाए गए।''
उन्होंने कहा कि रोकथाम गतिविधियों की समीक्षा के लिए रामनाट्टुकारा नगर पालिका में त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) की बैठक भी आयोजित की गई।
हाल ही में 43 वर्षीय एक व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी और उसका उपचार कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहा है।
निपाह एक जूनोटिक (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला) वायरस है, जो पशुओं से मनुष्यों में तथा कुछ मामलों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
फ्रूट बैट (फलाहारी चमगादड़), जिन्हें 'फ्लाइंग फॉक्स' भी कहा जाता है, इस वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। यह संक्रमण गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी और मस्तिष्कशोथ (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है तथा इसकी मृत्यु दर काफी अधिक होती है।
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