गोविंदपुरी अग्निकांड में संलिप्तता के आरोप में नाबालिग समेत चार लोगों को पकड़ा गया
राजकुमार
- 14 Jun 2026, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के गोविंदपुरी अग्निकांड मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में 17 वर्षीय एक लड़की समेत चार लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में एक बहुमंजिला आवासीय इमारत में 12 जून को तड़के करीब दो बज कर 20 मिनट पर आग लग गई थी। इस घटना में पंकज पांडे (28), उनकी बहन सोनिया (20) और उनकी नानी सुशीला देवी (70) की मौत हो गई थी, जबकि आठ अन्य लोग झुलस गए थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने करीब 80,000 रुपये के लेनदेन को लेकर एक व्यक्ति को ''सबक सिखाने'' के इरादे से इस इमारत में खड़ी एक स्कूटर में आग लगा दी थी।
पुलिस ने बताया कि इमारत की पांचवीं मंजिल पर रहने वाले दीपक ने कथित तौर पर आरोपियों से पैसे लिए थे तथा बार-बार मांगे जाने के बावजूद उसने पैसे वापस नहीं किए, जिससे आरोपी उससे नाराज थे।
पुलिस ने कहा, ''जब उनके प्रयास विफल हो गए तो उन्होंने दीपक को सबक सिखाने के लिए भूतल पर खड़ी उसकी स्कूटर में आग लगाने की साजिश रची। हालांकि, आग तेजी से अन्य वाहनों तक फैल गई और पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई।''
आग लगने की घटना के बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इस दौरान एक नकाबपोश महिला घटना से कुछ समय पहले देर रात करीब दो बज कर 23 मिनट पर इमारत में प्रवेश करती दिखाई दी। कुछ ही देर बाद परिसर के अंदर से तेज रोशनी दिखाई दी और इसके बाद महिला वहां से निकलती नजर आई।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हेमंत तिवारी ने एक बयान में कहा, ''जांच दल ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और आग लगने से कुछ समय पहले एक महिला को परिसर में प्रवेश करते देखा। जुटाए गए सबूतों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आग जानबूझकर लगाई गई थी।''
इसके बाद जांचकर्ताओं ने नाबालिग लड़की की पहचान कर उसे पकड़ लिया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर सरिता की संलिप्तता और घटना की साजिश रचने में अन्य आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों को लगा था कि दीपक अपनी गाड़ी के नष्ट हो जाने पर पैसा चुकाने के लिए बाध्य हो जायेगा।
पुलिस उपायुक्त ने कहा, ''जांच में पता चला कि नवजीवन कैंप के निवासी निरंजन (33) और उसके भाई राजकुमार (27) ने कथित तौर पर यह योजना बनाई थी क्योंकि वे दीपक पर पैसे लौटाने का दबाव बनाना चाहते थे।''
पुलिस ने बताया कि सरिता, निरंजन और राजकुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 287 (आग संबंधी लापरवाही) और धारा 106(1) (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस ने मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद बीएनएस के तहत आपराधिक साजिश, गैर-इरादतन हत्या, गैर-इरादतन हत्या के प्रयास, आग से नुकसान पहुंचाने और रात में छिपकर घर में घुसने से संबंधित धाराएं भी जोड़ दी हैं।
पुलिस के अनुसार, 12 जून को देर रात दो बज कर 31 मिनट पर घटना की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस दल तत्काल मौके पर पहुंचा था। दमकल कर्मियों, पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान चलाकर इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकाला।
पुलिस के अनुसार, इस घटना में आठ लोग झुलस गये थे, जिन्हें इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। घटना में गंभीर रूप से झुलसे में पंकज की मां गुड्डी देवी (50), जो बोलने में असमर्थ हैं और उसकी छोटी बहन मोनी (18) शामिल हैं।
पुलिस ने कहा कि जांच में यह साबित हुआ है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं लगी थी, जैसा कि शुरुआत में आशंका जताई गई थी। उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिला कि यह किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने के उद्देश्य से की गई एक पूर्वनियोजित आगजनी थी।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
भाषा प्रचेता राजकुमार
राजकुमार
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