नीट प्रश्नपत्र लीक के झूठे दावे फैलाने के लिए टेलीग्राम की खामी का फायदा उठाया गया: एनटीए, आईआईटी
शफीक
- 16 Jun 2026, 08:16 PM
- Updated: 08:16 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास ने नीट पुनर्परीक्षा से पहले 'टेलीग्राम' ऐप पर लगाये गए अस्थायी प्रतिबंध को मंगलवार को उचित ठहराया। एनटीए और आईआईटी, मद्रास ने ऐसे उदाहरणों का हवाला दिया, जिनमें इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संपादित किये गए मैसेज के जरिए प्रश्न पत्र लीक होने के सबूत गढ़ने के लिए किया गया था।
हालांकि, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने टेलीग्राम पर सरकार की पाबंदियों की आलोचना की और इस कदम को परीक्षा में गड़बड़ी का एक अस्थायी समाधान और अपर्याप्त उपाय बताया।
इस बीच, सूत्रों के मुताबिक, गूगल ने 'प्ले स्टोर' से 'मैसेजिंग ऐप' टेलीग्राम को हटा दिया है और सरकारी आदेश का पालन करते हुए 'एप्पल' भी ऐसा ही कर सकता है।
टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी पाबंदियों की वजह बताते हुए एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि यह उपाय दोबारा होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की शुचिता बनाए रखने के लिए किया गया है, क्योंकि गड़बड़ी के आरोपों के कारण तीन मई की परीक्षा रद्द कर दी गई थी।
सिंह ने 'एक्स' पर एक वीडियो संदेश में कहा, ''परीक्षा रद्द करने और पुनर्परीक्षा के आयोजन तथा सीबीआई जांच के आदेश का मुख्य कारण यह सुनिश्चित करना था कि एनटीए के जरिये होने वाली परीक्षाओं और नीट परीक्षा परीक्षाओं की शुचिता व निष्पक्षता का कोई भी उल्लंघन न कर सके। साथ ही, मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कर रहे मेहनती छात्रों के अधिकारों को कोई भी नहीं छीन सके।''
उन्होंने उन अभ्यर्थियों पर पड़ने वाले दबाव को स्वीकार किया, जिन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया है।
सिंह के अनुसार, एक बड़ी चिंता 'टेलीग्राम' का गलत इस्तेमाल है।
उन्होंने कहा, ''सोशल मीडिया पर ऐसे टेलीग्राम चैनलों की कहानियां भरी पड़ी हैं जो नीट-यूजी 2026 के लिए फिर से परीक्षा के प्रश्न पत्र बेचने का दावा कर रहे हैं। हमने ऐसे हर दावे की जांच की है और पाया कि वे सभी फर्जी हैं।''
सिंह ने कहा कि ऐसे चैनलों के पीछे मौजूद लोग झूठे वादे करके छात्रों और उनके माता-पिता से पैसे ऐंठते हैं और उनका फायदा उठाते हैं।
उन्होंने कहा, ''अगर आपसे कोई प्रश्न पत्र बेचने का दावा करता है, तो वह झूठ बोल रहा है, आपके साथ ठगी करने की कोशिश कर रहा है, आपको बेवकूफ बना रहा है और आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर पैसे ऐंठ रहा है।''
उन्होंने कहा, ''उनमें से किसी की भी असली प्रश्न-पत्र तक पहुंच नहीं है, जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं। प्रश्न पत्र तैयार करने और उनकी छपाई व परीक्षा केंद्र तक पहुंचाये जाने को सुरक्षित बनाने के लिए हमने उच्चतम स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की है। हमने भारतीय वायुसेना की मदद ली है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है।''
सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीग्राम चैनल मैसेज-संपादन विशेषता का इस्तेमाल करके ऐसी गलतफहमी पैदा करते हैं, मानो परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र उपलब्ध थे।
उन्होंने कहा, ''टेलीग्राम चैनल लंबे समय से ऐसा कर रहे हैं कि वे टेलीग्राम चैट के वीडियो और स्क्रीनशॉट दिखाते हैं, जिनमें परीक्षा की तारीख से पहले की तारीख वाले प्रश्न पत्र दिखाई देते हैं।''
सिंह ने हालिया नीट-यूजी परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा, ''3 मई को जब परीक्षा हुई, तो हमें ऐसी ही एक शिकायत मिली। परीक्षा के बाद कई सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें एक प्रश्न पत्र दिख रहा था। यह वही प्रश्न पत्र था जिसे परीक्षा से दो दिन पहले, यानी 1 मई को टेलीग्राम चैनल पर साझा किया गया था।''
सिंह के मुताबिक, एनटीए ने मामले की जांच की और पाया कि वीडियो में दिख रहे प्रश्न पत्र पर एक विशेष पहचान कोड है। उन्होंने कहा, ''नीट परीक्षा के हर प्रश्न पत्र पर एक अनूठा पहचान कोड होता है। इसलिए, हम हर प्रश्न पत्र को ट्रैक कर सकते हैं कि उसका इस्तेमाल कहां हुआ था।''
जांच के बारे में विस्तार से बताते हुए सिंह ने कहा कि एनटीए उस प्रश्न पत्र का पता लगाने में सफल रही जो वायरल वीडियो में दिख रहा था। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने प्रश्न पत्र के विशेष पहचान कोड का इस्तेमाल किया।
उन्होंने बताया, ''हमने उस प्रश्न पत्र के बारे में पता लगाया जो वीडियो में दिख रहा था। यह जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सगम स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक अभ्यर्थी को दिया गया था।''
उन्होंने कहा, ''यह प्रश्न पत्र 3 मई की दोपहर को मजिस्ट्रेट की देखरेख में उस छात्र को दिया गया था। पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज है। हमने पूरी जांच की... वह छात्र 3 मई को परीक्षा में शामिल हुआ था।''
सिंह ने कहा, ''परीक्षा के बाद छात्र की ओएमआर शीट भी एनटीए को वापस मिल गई थी। इसलिए यह स्पष्ट है कि यह टेलीग्राम चैट मनगढ़ंत थी।''
उनके अनुसार, जांच में यह पाया गया कि टेलीग्राम चैनल 'एडमिन' को पहले से पोस्ट किये गए मैसेज को संपादित करने की सुविधा देता है, जबकि मूल 'टाइमस्टैम्प' पूर्ववत रहता है।
सिंह ने कहा, ''टेलीग्राम में एक खामी है जिसकी वजह से टेलीग्राम चैनल के एडमिन पुरानी तारीख की चैट को संपादित कर सकते हैं... जब वे ऐसा करते हैं, तो टाइमस्टैम्प वही रहता है।''
इस समस्या के बारे में बताते हुए आईआईटी, मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी ने कहा कि टेलीग्राम उपयोगकर्ता को मूल 'टाइमस्टैम्प' बदले बिना मैसेज संपादित करने की सुविधा देता है, जिससे इसके गलत इस्तेमाल की गुंजाइश बनती है।
कामाकोटी ने कहा, ''टेलीग्राम प्लेटफॉर्म में एक खामी है। आप आज अपराह्ल 3 बजे कोई मैसेज भेज सकते हैं और बाद में किसी भी दिन, बिना टाइमस्टैम्प बदले, उस मैसेज को संपादित कर सकते हैं। इसलिए, जो लोग उस मैसेज को अगले दिन या उसके बाद देखेंगे, उन्हें ऐसा लगेगा कि मैसेज आज अपराह्न 3 बजे ही भेजा गया था।''
भाषा सुभाष शफीक
शफीक
1606 2016 दिल्ली