बंगाल: तृणमूल का संकट गहराया, शोभनदेव सर्वदलीय बैठक में नहीं बुलाये गये, बागी गुट को न्योता
सुरेश
- 16 Jun 2026, 10:05 PM
- Updated: 10:05 PM
कोलकाता, 16 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के अंदर की फूट मंगलवार को एक बार फिर सामने आई।
बजट सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में ममता बनर्जी के वफादार विधायकों को नहीं बुलाया गया, जबकि विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के सदस्यों को निमंत्रण मिला।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरने के बावजूद तृणमूल अभूतपूर्व आंतरिक बगावत से जूझ रही है, फलस्वरूप विधानसभा के भीतर सत्ता का संतुलन बदल गया है।
बजट सत्र 18 जून से शुरू होने वाला है।
इससे पहले, विपक्ष में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच विधानसभा की सर्वदलीय एवं कार्य मंत्रणा समिति की बैठकें और भी अहम हो गईं।
विधानसभा सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के वरिष्ठ विधायक एवं विपक्ष के नेता के तौर पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय को बैठक में नहीं बुलाया गया था। बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष का नाम भी आमंत्रित लोगों की सूची में नहीं था।
इसके बजाय, पार्टी से निकाले गए तृणमूल विधायक रिताब्रता बनर्जी के गुट को निमंत्रण भेजा गया। हाल में विधानसभाध्यक्ष रतींद्र नाथ बसु ने उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी, क्योंकि बागी तृणमूल विधायकों के बहुमत ने बनर्जी के दावे का समर्थन किया था।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा ने सदन के भीतर उभरती हुई संख्या-संबंधी वास्तविकताओं को मान्यता देना शुरू कर दिया है।
यह घटनाक्रम तृणमूल विधायक दल के भीतर हुए ज़बरदस्त विद्रोह के बाद सामने आया है।
कुछ ही दिन पहले, पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने नेतृत्व की बात न मानते हुए और पार्टी आलाकमान द्वारा चुने गए चट्टोपाध्याय को खारिज करते हुए, विपक्ष के नेता के पद के लिए रिताब्रता बनर्जी के दावे का समर्थन किया था।
तब से, बागी गुट का संख्याबल बढ़कर 65 विधायक हो गया, जिससे विधानसभा में रिताब्रता बनर्जी की स्थिति और मजबूत हुई है।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के कई गुटों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी, आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक मुस्तफिजुर रहमान शामिल थे।
विधानसभा का घटनाक्रम तृणमूल के संसदीय खेमे में चल रही व्यापक उथल-पुथल के बीच सामने आया है।
हाल में संसद में पार्टी को उस वक्त एक बड़ा झटका लगा, जब खबर आई कि उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्यों ने तृणमूल संसदीय दल से अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (एनसीपीआई) में विलय करने का फैसला किया और साथ ही भाजपा-नीत राजग को समर्थन देने का भी निर्णय लिया।
भाषा
राजकुमार सुरेश
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