जी7 देशों का ध्यान फिर यूक्रेन युद्ध पर, ट्रंप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए
सुरेश
- 16 Jun 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
एवियॉन (फ्रांस), 16 जून (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके साथी जी7 नेताओं ने यूक्रेन में चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध को मंगलवार को एक बार फिर अपने एजेंडे में शीर्ष पर लाने का फैसला किया। यही नहीं, ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति पर फिर से प्रतिबंध लगाने के संकेत भी दिए।
हाल के हफ्तों में ईरान युद्ध ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रमण से ध्यान हटा दिया था। हालांकि, तेहरान के साथ लगभग साढ़े तीन महीने पहले शुरू हुई लड़ाई को खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंचने की घोषणा करने के बाद ट्रंप ने कहा कि वह अब यूक्रेन पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, क्योंकि ईरान का मुद्दा "जल्द ही पीछे छूट जाएगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या वह रूस पर उन प्रतिबंधों को फिर से लागू करेंगे, जिन्हें तेल की कीमतें कम करने में मदद के लिए हटाया गया था, ट्रंप ने कहा कि जैसे-जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बढ़ेगी, प्रतिबंधों को फिर से लागू किया जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "जल्द ही हम ऐसा कर पाएंगे, क्योंकि अब तेल की आवाजाही आसाना हो जाएगी। हम जल्द ही ऐसा करने की स्थिति में होंगे।"
अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बीच मार्च में रूस से तेल की आपूर्ति पर लागू कुछ प्रतिबंधों में ढील दे दी थी। पश्चिम एशिया में युद्ध जारी रहने के मद्देनजर यह ढील बढ़ाने का फैसला लिया गया था।
फ्रांस के एवियॉन शहर में मंगलवार को आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के सुबह के सत्र में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की शामिल हुए, लेकिन बातचीत महज 75 मिनट में खत्म हो गई।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन शांति स्थापना को लेकर गंभीर है, जबकि रूस दुनिया के नेताओं के साथ "खेल" खेल रहा है। उन्होंने कहा, "आज जी7 के सभी सदस्य एकमत होकर यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं।"
जेलेंस्की ने कहा कि रूस शांति समझौते की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि जी7 नेताओं ने यूक्रेन के लिए और 'पैट्रियट' मिसाइल की जरूरत का समर्थन किया और इस बात पर चर्चा की कि लाइसेंस के जरिये इनका उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए।
'पैट्रियट' मिसाइल यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और शहरों पर रूस के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का मुकाबला करने में सक्षम हैं।
इससे पहले, ट्रंप प्रशासन ने रूसी आक्रमण से निपटने के लिए यूक्रेन को दी जाने वाली मदद में कटौती कर दी थी, जिससे फ्रांस और कुछ अन्य यूरोपीय देश कीव को सबसे ज्यादा सैन्य और आर्थिक मदद मुहैया कराने वाले देश बन गए थे।
स्विट्जरलैंड की सीमा के करीब स्थित एवियॉन में ट्रंप ने अमेरिका पर रूस-यूक्रेन युद्ध के असर को कम करके आंका, लेकिन इसमें जानमाल के नुकसान पर दुख जताया।
उन्होंने कहा, "यह सब बेतुका है। इसलिए, मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, वह करूंगा।"
इस बीच, ब्रिटेन ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए रूस की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले "गुप्त बेड़े" और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए मॉस्को की ओर से अपनाए जाने वाले वित्तीय ढांचे को लक्षित करते हुए नये प्रतिबंधों की घोषणा की।
खबरों के मुताबिक, जिन जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें से कई को रूस ने हाल में अपनी 'आर्कटिक एलएनजी-2' परियोजना से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने के लिए खरीदा था। पिछले हफ्ते ब्रिटिश सेना ने इंग्लिश चैनल में रूस के 'गुप्त बेड़े' में शामिल जहाज को जब्त किया था।
जी7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत से कुछ घंटे पहले रूस ने यूक्रेन के प्रमुख शहरों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और एक धार्मिक स्थल में आग लग गई।
ये हमले रविवार को ऐसे समय में किए गए, जब पुतिन और जेलेंस्की ने ट्रंप के 80वें जन्मदिन के मद्देनजर कुछ देर पहले फोन पर उनसे अलग-अलग बात करते हुए शुभकामनाएं दी थीं।
ट्रंप ने 2024 में अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान दावा किया था कि वह कार्यभार संभालने के 24 घंटे के भीतर रूस-युद्ध समाप्त करवा देंगे। हालांकि, बातचीत में लगातार अड़चनें आई हैं और ट्रंप ने माना है कि यह काम उतना आसान नहीं है, जितना उन्होंने शुरू में सोचा था।
मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के सत्रों में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता छाया रहा। ट्रंप ने समझौते को कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के विचार के लिए भेजने की मंशा जाहिर की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन से इतर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के दौरान यह बात कही।
उन्होंने कहा, "मुझे यह विचार पसंद आया, कृपया इसे कांग्रेस के पास भेजें। मेरा मतलब है कि इसके लिए कौन तैयार नहीं होगा?"
रिपब्लिकन सांसदों ने कहा कि वे समझौते पर ट्रंप से और स्पष्टता चाहते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोक पाएगा या नहीं।
ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन से इतर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के साथ आमने-सामने की बातचीत की। पश्चिम एशियाई देश जी7 का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन मेजबान देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इनके नेताओं को शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया है।
ट्रंप ने ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिज्बुल्ला के साथ इजराइल के लगातार जारी टकराव पर नाखुशी जाहिर करते हुए संवाददाताओं से कहा, ''इजराइल ने लेबनान और हिजबुल्ला के साथ जिस तरह से बर्ताव किया है, वह उससे खुश नहीं हैं।''
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "उन्हें (इजराइल को) उनसे (हिजबुल्ला से) ज्यादा तेजी से निपटना चाहिए था। यह बस चलता ही रहता है। जब ऐसा होता है, तो इससे बड़े समझौते पर बुरा असर पड़ता है... और ईरान के साथ होने वाले समझौते के मामले में भी ऐसी ही है।"
अमेरिका के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ हुए समझौते को तेजी से लागू करने की मांग की, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण तेल की बढ़ती कीमतों के आर्थिक असर को कम किया जा सके।
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और अन्य सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को शांतिपूर्ण ढंग से फिर से खोलने में मदद के लिए "बहुत तेजी से कदम उठाने को तैयार" हैं। फ्रांस और ब्रिटेन ने हालात ठीक होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा बहाल करने के वास्ते अभियान चलाने की भी वकालत की।
जी7 में फ्रांस, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में ब्राजील, भारत, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य देशों को भी कुछ चर्चाओं में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
एपी पारुल सुरेश
सुरेश
1606 2230 एवियॉन (फ्रांस)