के. कविता का पिता केसीआर से सुलह से इनकार
अमित
- 17 Jun 2026, 02:15 PM
- Updated: 02:15 PM
(फाइल तस्वीर के साथ)
हैदराबाद, 17 जून (भाषा) तेलंगाना रक्षणा सेना (टीआरएस) की प्रमुख के. कविता ने अपने पिता और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के साथ सुलह की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि बीआरएस के साथ उनका संबंध समाप्त हो चुका है और वह अपनी नयी राजनीतिक पार्टी के साथ आगे बढ़ रही हैं।
कविता ने 'पीटीआई वीडियो' के साथ साक्षात्कार में कहा, ''वह अध्याय अब समाप्त हो चुका है। कहते हैं कि जीवन में कभी-कभी पन्ना पलटना होता है और कभी-कभी किताब बंद करनी पड़ती है। मैंने बीआरएस नामक किताब बंद कर दी है। अब मैं टीआरएस (तेलंगाना रक्षणा सेना) के साथ नया इतिहास लिखूंगी।''
कविता ने यह बात इस सवाल पर कही कि क्या उनके पिता की ओर से सुलह का प्रस्ताव आने पर वह वापस जाएंगी।
कविता ने कहा कि बीआरएस के सत्ता में रहते हुए कई महत्वपूर्ण वादों को पूरा नहीं कर पाने और आंतरिक मतभेदों के कारण उन्हें नयी पार्टी बनानी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी कारण बताओ नोटिस के पार्टी से बाहर किया गया और आंतरिक लोकतंत्र का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी तेलंगाना के क्षेत्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देगी, जबकि तेलंगाना में बीआरएस और अन्य दल राष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
कविता से जब पूछा गया कि उनकी पार्टी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन है तो उन्होंने कांग्रेस का नाम लिया क्योंकि वह सत्ता में है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीआरएस को ''निष्क्रिय स्थिति'' में बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ही वर्तमान में जन मुद्दों पर सक्रिय संघर्ष कर रही है।
उन्होंने स्वीकार किया कि वह बीआरएस सरकार में रहते हुए कुछ मुद्दों पर और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती थीं, लेकिन पार्टी के भीतर सीमाओं के कारण ऐसा संभव नहीं था।
दिल्ली शराब नीति मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन पर आरोप कभी तय नहीं हुए और अदालत ने उन्हें राहत दी है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को न्यायपालिका पर छोड़ती हैं।
कविता ने दावा किया कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति, युवाओं, महिलाओं और किसानों के मुद्दों पर काम करेगी और एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के दरवाजे वाम दल जैसे समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए खुले हो सकते हैं।
भाषा मनीषा अमित
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