आंध्र प्रदेश : काकीनाडा से लापता बच्ची की 12वें दिन भी तलाश जारी
नेत्रपाल
- 17 Jun 2026, 04:19 PM
- Updated: 04:19 PM
काकीनाडा, 17 जून (भाषा) आंध्र प्रदेश के काकीनाडा से लापता हुई दो साल की बच्ची की तलाश बुधवार को लगातार 12वें दिन भी जारी रही।
पुलिस अपहरण, किसी जानवर के हमले और परिवार से जुड़े झगड़ों जैसे सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।
बच्ची काकीनाडा जिले के च-अग्राहरम गांव से छह जून को लापता हुई थी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), श्वान दस्ते, तकनीक टीम और वन व अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।
इस संबंध में एक अधिकारी ने मंगलवार देर रात संवाददाताओं से कहा, ''हम अपहरण और जानवरों के हमले से लेकर परिवार से जुड़े झगड़ों तक, हर संभावना की जांच कर रहे हैं तथा हर सुराग पर काम कर रहे हैं, चाहे वह कितना भी मामूली क्यों न हो। टीम पहाड़ियों, जंगलों, जलाशयों और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं।''
पुलिस के मुताबिक, बच्ची अपने पालतू कुत्ते के साथ गांव के पास काजू के बागान की तरफ गई थी। लापता होने से पहले उसे बागान की सीमा पर बनी बाड़ के पास देखा गया था।
इसने बताया कि एक ग्रामीण ने बच्ची को देखा और उसे लाने की कोशिश की, लेकिन तभी कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और बाद में उसने उसके माता-पिता को जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि जब तक परिवार के सदस्य और ग्रामीण करीब 35 मिनट बाद मौके पर पहुंचे तब बच्ची गायब थी।
अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान में लगी टीम ने तुरंत उस इलाके की तलाशी ली और बाद में आसपास की पहाड़ियों तक अपने अभियान का विस्तार किया।
उन्होंने कहा कि गांव के आस-पास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड तस्वीरों का विश्लेषण किया और ऑटो-रिक्शा, वैन तथा वाहन संचालकों से पूछताछ की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची को किसी गाड़ी में तो नहीं ले जाया गया।
अधिकारियों ने मोबाइल फोन सिग्नल डेटा का विश्लेषण किया और घटना के समय उस इलाके में सक्रिय लगभग 170 मोबाइल नंबरों की पहचान की।
अधिकारी ने बताया कि चार टीम उन आंकड़ों की जांच कर रही हैं और घटना से पहले वहां मौजूद उन लोगों की गतिविधियों का सत्यापन कर रही हैं जो बाद में उस इलाके से चले गए थे।
पुलिस ने गांव के सभी 470 घरों का सर्वेक्षण किया और करीब 150 लोगों से पूछताछ की।
जांचकर्ता साथ ही साथ किसी जानवर के हमले की संभावना की भी जांच कर रहे हैं।
पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने संभावित घटना का नाट्य मंचन किया और छह जून को दोपहर के समय जहां बच्ची को आखिरी बार देखा गया था, ठीक उसी स्थान पर मांस वाली एक गुड़िया रखी।
उक्त स्थान पर जासूसी कैमरे लगाए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई जानवर उस जगह की ओर आकर्षित हो रहा है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया वैज्ञानिक है और इसे अमावस्या से जुड़े अंधविश्वासों या मान्यताओं से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
निवासियों ने अधिकारियों को बताया है कि गांव के पास लगभग 500 एकड़ में फैली जंगली पहाड़ियों में सियार, जंगली कुत्ते, जंगली सूअर और अजगर रहते हैं तथा कभी-कभी वे आसपास की बस्तियों में भी आ जाते हैं।
अधिकारी ने कहा कि पुलिस अजगर के हमले की आशंका की भी जांच कर रही है।
उन्होंने कहा, ''अगर किसी अजगर ने बच्ची को निगला होता, तो वह शायद कुछ समय तक आसपास ही रहता, क्योंकि शिकार करने के बाद ये जीव आम तौर पर ज्यादा दूर या तेजी से नहीं जाते। वन विभाग के अधिकारी इस आशंका की अलग से जांच कर रहे हैं।''
परिवार का पालतू कुत्ता जांच के केंद्र में है क्योंकि बच्ची के लापता होने के चार दिन बाद वह परेशान हालत में लौटा था। पुलिस के मुताबिक, वह डरा हुआ था, आक्रमक व्यवहार कर रहा था और यहां तक कि उसने अपने मालिक को ही काट लिया।
बताया जाता है कि वह कुत्ता बच्ची से बहुत जुड़ा हुआ था। पशु-चिकित्सकों ने उसका इलाज किया और बाद में उसके गले में जीपीएस ट्रैकर लगाया गया।
अधिकारी ने बताया कि जीपीएस आंकड़ों से जानकारी मिली कि उसने लगभग आठ किलोमीटर का सफर तय किया, और यह रास्ता ज्यादातर वही था जिसकी पहचान पहले पुलिस के श्वान दस्ते ने की थी।
पुलिस ने पालतू कुत्ते द्वारा तय किए गए रास्तों की दोबारा तलाशी ली, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में कुत्ते की मौत हो गई और उसका पोस्टमॉर्टम किया गया।
अधिकारी ने बताया कि अपहरण और किसी जानवर के हमले की आशंकाओं के अलावा, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इस मामले में पैसों के लेन-देन का विवाद, आपसी रंजिश या परिवार से जुड़ी कोई बात शामिल थी।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल
1706 1619 काकीनाडा