सहमति, भद्दे चुटकुले और दर्शकों के ठहाके : स्टैंड-अप कॉमेडी फिर सवालों के घेरे में
मनीषा
- 17 Jun 2026, 04:36 PM
- Updated: 04:36 PM
(माणिक गुप्ता)
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) एक कॉमेडी शो में दर्शक दीर्घा में बैठा एक व्यक्ति कहता है कि बिरयानी पर 370 रुपये खर्च करने से उसे यौन संबंध बनाने का हक मिल जाता है। वह एक ऐसी महिला के साथ अंतरंग होने की अपनी कोशिशों का भी विस्तार से वर्णन करता है, जो इसके लिए तैयार नहीं थी।
एक अन्य कॉमेडी शो में एक स्टैंड-अप कॉमेडियन के सारे चुटकुले "दुष्कर्म के बाद गले लगाने", नेक्रोफिलिया (शव के साथ यौन क्रिया) और बलात्कार के बाद हत्या करने वालों पर केंद्रित होते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि ऐसी भद्दी कॉमेडी पर जोरदार ठहाके लगते हैं।
ऐसे कॉमेडी शो के दर्शकों में ज्यादातर पुरुष शामिल होते हैं। व्यंग्य और चुटकुलों में अक्सर महिलाओं के प्रति नफरत की भावना छिपी होती है और सहमति से जुड़े मुद्दों तथा बलात्कार को सामान्य मानने, जबकि यौन हमले एवं हत्या को मामूली बात समझने जैसी प्रवृत्ति देखने को मिलती है।
दोनों शो से जुड़े वीडियो इस मुद्दे पर बहस का केंद्र बन गए हैं कि कॉमेडी में कौन-सी सीमाएं किस तरह निर्धारित की जानी चाहिए। इनमें से एक शो प्रणीत मोरे, जबकि दूसरा मधुर विरली का था।
दो बार के ऑस्कर पुरस्कार विजेता ब्रिटिश अभिनेता पीटर उस्तीनोव ने कॉमेडी को "गंभीर होने का एक मजेदार तरीका" बताया था। स्टैंड-अप कॉमेडियन हमेशा सुर्खियों में रहे हैं, क्योंकि उनका काम लोगों के चेहरे पर ऐसी हंसी लाना है, जो थोड़ी असहज करने वाली हो।
समकालीन मुद्दों पर व्यंग्यात्मक अंदाज के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले कुछ भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडियन आज की स्टैंड-अप पारिस्थितिकी में कामयाब तो हो रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने कॉमेडी को पीछे छोड़ दिया है और सिर्फ आपत्तिजनक टिप्पणियों से लोगों को हंसाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसे में इस विषय पर मंथन करने की जरूरत बढ़ जाती है कि हास्य असल में है क्या।
बलात्कार-विरोधी कार्यकर्ता योगिता भयाना ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "कार्यकर्ताओं को थोड़ी कायमाबी भी मिलती है, लेकिन ऐसे वीडियो और भद्दे मजाक उन्हें वापस वहीं ले आते हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी। जब जबरदस्ती यौन संबंध बनाने जैसी गंभीर बात को मजाक के तौर पर लिया जाता है और लाखों लोग इसे देखते हैं, तो इससे गलत संदेश जाता है।"
उन्होंने कहा, "मैं लोगों को गिरफ्तार करने की मांग नहीं कर रही हूं, लेकिन जो कुछ कहा और अपलोड किया जा रहा है, उसके लिए जवाबदेही तो तय होनी ही चाहिए। साथ ही इन चुटकुलों पर दर्शकों की हंसी को भी नहीं भूलना चाहिए। ये चुटकुले समाज के बारे में उससे कहीं ज्यादा बताते हैं, जितना हम मानना चाहेंगे।"
मोरे और विरली की 'क्राउड वर्क' क्लिप सामने आने से पहले पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया ने कॉमेडियन समय रैना के यूट्यूब शो में माता-पिता और यौन संबंधों को लेकर अश्लील टिप्पणियां करके एक बड़े विवाद को जन्म दिया था।
'क्राउड वर्क' स्टैंड-अप कॉमेडी का एक ऐसा तरीका है, जिसमें कलाकार पहले से तैयार की गई स्क्रिप्ट के आधार पर प्रस्तुति देने के बजाय दर्शकों के साथ मौके पर बिना किसी तैयारी के संवाद करते हैं।
अपने तलाक को लेकर समय रैना द्वारा बुरी तरह ट्रोल की गई डिजिटल क्रिएटर और अभिनेत्री कुशा कपिला ने शो की क्लिप पोस्ट करने के लिए मोरे की कड़ी आलोचना की।
कपिला ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक व्यंग्यात्मक वीडियो में "370 रुपये की बिरयानी" वाले चुटकुले की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने कहा, "अगर डेट पर ₹370 रुपये खर्च होते हैं और सामने वाला ₹270 रुपये के बराबर बदतमीजी करता है, तो बाकी बचते हैं 100---तुरंत उस नंबर पर फोन करें।"
कपिला ने कहा, "ढंग का व्यक्तित्व खरीदने के लिए कितनी बिरयानी चाहिए? यह एक पेचीदा सवाल है, जिसका जवाब मुश्किल है। अगर ₹370 रुपये से प्यार, वफादारी और ध्यान पाने की उम्मीद की जाए, तो खुद के विकास की संभावना शून्य है।"
मोरे की क्लिप एक सामान्य 'क्राउड वर्क' के रूप में शुरू होती है, लेकिन 23 वर्षीय हिमांशु जांगड़ा के भद्दे चुटकुलों से यह परेशान करने वाले वीडियो में बदल जाती है।
क्लिप में हिमांशु यह कहते दिखाई देता है, "मैंने कहा 370 रुपये लगे हैं, मैं वसूल तो करूंगा।" मोरे इसे "पीक गुड़गांव कंटेंट" बताते हैं और "सबसे अच्छी कहानी" सुनाने के लिए हिमांशु को दर्शकों के ठहाकों के बीच इनाम के तौर पर 5,000 रुपये नकद देते हैं।
'पीक गुड़गांव कंटेंट' इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक व्यंग्यात्मक शब्द है, जिसका इस्तेमाल अक्सर उन अजीब, असाधारण या अनैतिक घटनाओं/व्यवहारों को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो कॉर्पोरेट संस्कृति, आधुनिक डेटिंग की समस्याओं या संवेदनहीनता से जुड़े होते हैं।
हिमांशु इसके बाद इशारों के साथ बताता है कि कैसे युवती बार-बार "न" कहती है, लेकिन वह उसकी बात को नजरअंदाज करते हुए उसके साथ अंतरंग होने की कोशिश करता है।
बाद में इस बातचीत को संपादित किया गया, इसमें सबटाइटल जोड़े गए और मोरे ने इसे अपने 20 लाख सब्सक्राइबर के लिए अपलोड किया। आम तौर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के तहत मोरे ने क्लिप अपलोड करने से पहले हिमांशु की सहमति तो ली, लेकिन युवती की रजामंदी जैसे बड़े मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
वीडियो के वायरल होने और इस पर बखेड़ा खड़ा होने के बाद गुरुग्राम स्थित स्टारविक ने हिमांशु को उसकी "आपत्तिजनक टिप्पणियों" के लिए नौकरी से निकाल दिया। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मोरे और हिमांशु के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए समन जारी किए हैं।
जल्द ही इस विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया।
मोरे के "लेडीज स्पेशल" शो के क्लिप फिर से सामने आए, जिनमें मुंबई के केईएम कॉलेज की मेडिकल छात्रा सेजल पवार को पुरुषों के शव के निजी अंगों के बारे में भद्दी टिप्पणियां करते हुए देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सेजल को सजा देने की मांग की। इसके बाद कॉलेज ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की और सेजल को 15 दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया।
भयाना ने कहा, "अगर सेजल ने कुछ गलत कहा है, तो उसे जवाबदेह ठहराए जाने से मुझे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन 'उसने भी तो ऐसा कहा था' वाला तर्क 'व्हाटाबाउटरी' का शानदार उदाहरण है और मामले में लैंगिक बहस को घसीटने का एक हथकंडा है। इससे किसी को भी दोष मुक्त नहीं किया जा सकता।"
'व्हाटाबाउटरी' बहस या तर्क की ऐसी रणनीति है, जिसमें किसी आलोचना या सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय सामने वाले पर ही पलटवार कर दिया जाता है।
भयाना ने कहा, "आंकड़े दिखाते हैं कि अतीत में किसने ऐसे भद्दे मजाक किए और किसके बारे में किए। लोगों का गुस्सा अक्सर पुरुषों के अहं के आहत होने की वजह से होता है।"
विवाद के बाद मोरे और हिमांशु, दोनों ने कई बार माफी मांगी है।
मोरे ने कहा है कि वह "इस नफरत के हकदार" हैं। उन्होंने माना है कि उन्हें दखल देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मोरे ने कहा कि सब हंस रहे थे और वह "बहक गए" थे। उन्होंने इसे "फैसला लेने में हुई गंभीर चूक" बताया।
वहीं, हिमांशु ने कहा है कि उसे शो में शामिल होने का अफसोस है और उसने डेटिंग के अपने किस्से को मनोरंजक बनाने के लिए "कुछ मनगढ़ंत बातें" शामिल की थीं।
विरली ने भी दो साल पुराने अपने शो के क्लिप वायरल होने के बाद माफी मांगी है।
उन्होंने कहा है, "जो क्लिप साझा की जा रही है, वह लगभग दो साल पहले की मेरी एक प्रस्तुति की है... मेरा मानना है कि कॉमेडी के जरिये विचारों पर सवाल उठाए जा सकते हैं और मुश्किल विषयों पर बात की जा सकती है। लेकिन कुछ विषयों के लिए संवेदनशीलता, संदर्भ और समझदारी की जरूरत होती है।"
विरली ने कहा है, "जब कोई कोशिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाती, तो सबसे ईमानदार तरीका यही है कि उसे स्वीकार किया जाए, माफी मांगी जाए और आगे बेहतर किया जाए। मेरे लिए यह वैसा ही एक पल है।"
इन वीडियो क्लिप ने लाइव कॉमेडी और इसके बढ़ते दायरे को लेकर फिर से एक बड़ी बहस छेड़ दी है; जहां दर्शकों की हंसी सामग्री पर मुहर लगाती है, भद्दापन व्यंग्य की जगह ले लेता है और कुछ पल हमेशा के लिए वायरल कंटेंट बन जाते हैं।
कई चर्चित स्टैंड-अप कॉमेडियन ने दोनों विवाद से किनारा करने की कोशिश की। कुछ ने तो 'क्राउड वर्क' प्रारूप पर ही सवाल उठा दिए।
राजनीतिक हस्तियों के बारे में व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के लिए विवादों में रहे स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "स्टैंड-अप कॉमेडियन को इन चीजों का सहारा लेना बंद कर देना चाहिए : 1. कहानी सुनाना। 2. क्राउड वर्क। 3. कड़ी मेहनत। 4. बैंक बैलेंस। 5. माता-पिता।"
स्टैंड-अप कॉमेडियन देवेश दीक्षित ने स्टैंड-अप कॉमेडी में 'क्राउड वर्क' के इस्तेमाल के मौजूदा तरीके की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हर महीने वीडियो अपलोड करने की होड़ ने 'परफॉर्मर' को 'कंटेंट क्रिएटर' में बदल दिया है, जो अपनी कला के बजाय वायरल होने को ज्यादा अहमियत देते हैं।
भाषा पारुल मनीषा
मनीषा
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