नेतृत्व विवाद के बीच तृणमूल नेता अरूप बिस्वास ने पार्टी के बैंक खातों पर रोक लगाने की मांग की
नरेश
- 18 Jun 2026, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
कोलकाता, 18 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी संकट बृहस्पतिवार को और गहरा गया जब 'पार्टी कोषाध्यक्ष' अरूप बिस्वास ने एक बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के खातों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने इसके लिए पार्टी के वैध नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता और विधायकों तथा सांसदों की बगावत का हवाला दिया है।
इस कदम को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे के लिए एक और झटके के तौर पर देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ है जब विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद बागी विधायकों और सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के अधिकार को चुनौती दी और खुद को ''असली'' टीएमसी बताया।
कोलकाता में एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाज़ा शाखा के प्रबंधक को लिखा गया दो पन्ने का एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया। बैंक से इस घटनाक्रम के बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला, और पत्र की सच्चाई की पुष्टि के लिए बिस्वास को किए गए फोन और भेजे गए संदेश का भी कोई जवाब नहीं आया।
बारह जून के पत्र के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के तौर पर बिस्वास ने संबंधित बैंक से यथास्थिति बनाए रखने और विवाद के समाधान तक किसी भी निकासी या लेन-देन में बदलाव की अनुमति न देने का अनुरोध किया।
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि पांच जून को ममता बनर्जी खेमे की ओर से किए गए पुनर्गठन के दौरान बिस्वास को कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नियुक्त किया गया था।
हालांकि बैंक को भेजे गए पत्र में बिस्वास ने खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताया, जिससे संगठनात्मक अधिकार को लेकर प्रतिस्पर्धी दावों और वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बागी खेमे के सूत्रों ने कहा कि यह पत्र पार्टी की संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है, जो वर्तमान नेतृत्व संघर्ष के बीच और गहरा गया है।
पत्र में दावा किया कि पार्टी के भीतर प्रतिद्वंद्वी गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस के वैध प्रतिनिधि और पदाधिकारी बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि पार्टी के नाम पर संचालित बैंक खातों का संचालन करने का अधिकृत अधिकार वास्तव में किसके पास है।
बिस्वास ने यह आशंका भी जताई कि पार्टी के कोष का इस्तेमाल या उसे हड़पने का काम हो सकता है। उन्होंने आगाह किया कि विवाद के बीच, दस्तखत किए हुए चेक का गलत इस्तेमाल हो सकता है या उन्हें भुनाने के लिए पेश किया जा सकता है।
यह माना जा रहा है कि संबंधित खाता तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख खातों में से एक है। निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस खाते में जमा राशि लगभग 675 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिससे इस कोष पर नियंत्रण का मुद्दा राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में हार के बाद, पार्टी सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है।
राज्य विधानसभा में, रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 58 बागी विधायकों के एक समूह ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए खुद को अलग कर लिया। इस समूह को विधानसभा अध्यक्ष से प्रमुख विधायी दल के रूप में मान्यता भी मिल गई और उसने रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता निर्वाचित किया।
बाद में यह बगावत संसद तक पहुंच गई, जहां तृणमूल के 20 सांसदों ने- जिनमें सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल थे- पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से किनारा कर लिया और 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ़ इंडिया' (एनसीपीआई) में विलय की मांग की। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पार्टी के लोकसभा सदस्यों में से दो-तिहाई से ज़्यादा का समर्थन हासिल है।
बागी गुट से जुड़े तृणमूल विधायक कनाईलाल अग्रवाल ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''पार्टी के कोषाध्यक्ष के तौर पर अरूप बिस्वास को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें पार्टी की निधि के दुरुपयोग की आशंका है, तो वह बैंक को पत्र लिखकर खातों में लेन-देन या उनके संचालन पर रोक लगाने का अनुरोध कर सकते हैं।''
इस महीने की शुरुआत में ममता बनर्जी के गुट की ओर से कोषाध्यक्ष बनाए गए सुभाशीष चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
चक्रवर्ती ने कहा, ''मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता है। मैं राज्य संगठन का कोषाध्यक्ष हूं। अरूप राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे। लेकिन अभी सिर्फ़ एक ही कोषाध्यक्ष है, और वह मैं हूं।''
जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य और राष्ट्रीय इकाइयों के लिए अलग-अलग बैंक खाते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ''सिर्फ एक ही खाता है।''
भाषा आशीष नरेश
नरेश
1806 1824 कोलकाता