राम मंदिर की एसआईटी जांच ''दूध का दूध'' और ''पानी का पानी'' कर देगी : योगी आदित्यनाथ
रंजन
- 19 Jun 2026, 04:12 PM
- Updated: 04:12 PM
अयोध्या (उप्र), 19 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन को लेकर रामभक्तों को भरोसा दिया कि वे 15 दिन और इंतजार करें क्योंकि मामले में एसआईटी जांच दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।
योगी ने कहा कि हम लोगों के पूर्वजों ने पांच सौ वर्षों तक प्रभु राम के स्थान को लेने के लिए संघर्ष किया है तो 15 दिन और देख लो, चिंता मत करो।''
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में 378 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय समेत 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया।
योगी ने वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा का अनावरण करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन मे पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने जो प्रगति की है, वह सामाजिक एकता और सबके सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।''
अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर में दान पात्र और वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी का मामला आने के बाद योगी पहली बार शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे । योगी ने इसकी जांच के लिये लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में पिछले दिनों तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है।
योगी ने राम भक्तों को विश्वा दिलाया, ''मेरी सभी राम भक्तों से अपील होगी कि अयोध्या के बारे में जो समाचार पत्रों में सुनने को मिला, हम लोगों ने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बिठाई है, इस बात के लिए कह सकता हूं कि एसआईटी जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन मैं सभी से अनुरोध करूंगा, सभी पक्षों से कहूंगा कि कोई भी ऐसी अनर्गल टिप्पणी और बातें न हो जो राम भक्तों की भावनाओं को आहत करती हो। अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो कृपया एसआईटी को उपलब्ध करा दें।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''राम भक्तों से कहना चाहूंगा कि प्रभु राम ने हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाया है, मर्यादित रहने का आचरण दिया है और उस मर्यादा का पालन करते हुए हम लोगों के पूर्वजों ने पांच सौ वर्षों तक प्रभु श्रीराम के स्थान को लेने के लिए संघर्ष किया है, तो अब 15 दिन और देख लो, चिंता मत करो।''
योगी ने कहा कि पर, आप अयोध्या को बदनाम करने और राम जन्म भूमि मंदिर को अपमानित करने वालों के बहकावें मे कतई न आएं। ये लोग कभी नहीं चाहेंगे कि अयोध्या का काम हो, ये कभी नहीं चाहेंगे कि अयोध्या का सम्मान हो, क्योंकि ये लोग खुद क्षमताविहीन थे ।
मुख्यमंत्री ने पूर्वतर्वी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा वे क्यों लगवाते, उनको कब्रिस्तान की चारदीवारी की सोच से फुर्सत नहीं थी, वे वीरांगना की प्रतिमा कैसे लगवा सकते थे।
उन्होंने सपा का नाम लिये बगैर विपक्षी दल पर तंज कसते हुए कहा, ''ऐसा इसलिए था क्योंकि उनमें संवेदनशीलता और काम करने की इच्छाशक्ति की कमी थी। उनके लिए आपकी कोई अहमियत नहीं थी। उनके लिए उनका अपना परिवार ही सब कुछ था। अगर नौकरियां मिलतीं, तो सिर्फ़ उनके रिश्तेदार ही फ़ायदा उठाते और सभी सुविधाओं का मज़ा लेते।''
योगी ने कहा कि कांग्रेस और सपा कह रही है कि राम भक्तों का अपमान हो गया, तब क्या राम भक्तों का अपमान नहीं हो रहा था जब आपके नेता उच्चतम न्यायालय में बेशर्मी के साथ शपथ पत्र दाखिल करते थे कि ''राम थे ही नहीं।''
उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की अपनी पहचान है और अब देश-दुनिया के अंदर आप कहीं जाते हैं, और कहेंगे कि आप प्रदेश से हैं, अयोध्या से हैं तो अगला व्यक्ति आपको गले लगाने के लिए उतावला दिखाई पड़ता है।
उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले बलिदानियों, शहीदों की गौरवगाथा की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ''राष्ट्रनायकों का सम्मान, वीर-वीरंगनाओं के प्रति श्रद्धा का भाव हमें राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा प्रदान करता है।''
योगी ने कहा कि ''उसी राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा से प्रेरित होकर डबल इंजन की भाजपा सरकार ने सरकार बनने के बाद महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, महारानी अवंतीबाई लोधी, वीरांगना झलकारी बाई और वीरांगना उदा देवी के नाम पर अनेक अभियान शुरु किये हैं ।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि ''आज हम सब अपने भारत की अमर वीरांगना झलकारी बाई को जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में देश की आजादी के लिए फिरंगियों को नाको चने चबाने को मजबूर कर दिया था, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।''
योगी ने कहा, ''प्रदेश में तीन नई बटालियन वीरांगना अवंती बाई लोधी, वीरंगना झलकारीबाई कोरी और वीरांगना उदा देवी के नाम पर हमारी सरकार ने गठित की और यह सुनिश्चित किया है कि इन तीनों बटालियन में केवल और केवल बेटियां भर्ती होंगी।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि ''यह भी प्रदेश सरकार ने तय किया है कि जहां पर भी यह पीएसी की बटालियन गठित हो रही है, वहां पर इन वीरांगनाओं की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी, जो नयी पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देगी।''
उन्होंने झांसी की रानी, मंगल पांडेय, धन सिंह कोतवाल, बिजली पासी जैसे अनेक राष्ट्रनायकों, वीरांगनाओं की चर्चा करते हुए कहा, ''देश की आजादी की इस लड़ाई में राष्ट्रनायकों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और देश को सर्वोपरि करते हुए आजादी के लिए कार्य किया था।''
योगी ने कहा कि ''झांसी में प्रथम स्वाधीनता संग्राम के इस झंडे को 1857 में महारानी लक्ष्मीबाई ने बुलंद किया और उन्होंने अंग्रेजों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। 1858 में कुछ लोगों के धोखे से महारानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुई अन्यथा देश का इतिहास कुछ और होता।''
उन्होंने आजादी की इस संघर्ष यात्रा की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि '''आज हम एक नये भारत और नये उप्र में रह रहे हैं और डबल इंजन की सरकार अब विरासत और विकास के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को प्रभावी ढंग से लागू करने में प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो काम यहां हो रहा है, वास्तव में यह कार्य 1947 में शुरू हो जाना चाहिए था। आप देख रहे होंगे कि मोदी जी ने आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पूरे देश का आह़्वान किया कि अगर भारत को विकसित भारत बनाना है तो 25 वर्ष की एक बड़ी कार्ययोजना को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा।
इससे पहले योगी ने कहा कि जो लोग कुख्यात माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ते थे, वे आज हमें राम भक्ति का उपदेश देने चले हैं। इनके बहकावे में न आयें।
उन्होंने कहा, ''आज अयोध्या एक नई अयोध्या के रूप में दुनिया को आकर्षित कर रही है, यह विपक्ष को अच्छा नहीं लगता है। अयोध्या का विकास इनको अच्छा नहीं लगता है। ये लोग रामविरोधी थे, ये बर्दाश्त नहीं कर सकते।''
योगी ने दावा किया कि उन्होंने (अखिलेश यादव) आज तक रामजन्मभूमि का दर्शन नहीं किया।
प्रदेश सरकार में मंत्री और सपा से निष्कासित विधायक मनोज कुमार पांडेय का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि "पाण्डेय जी ने जब समाजवादी पार्टी के विधायक के रूप में कहा कि अयोध्या में सभी विधायकों को दर्शन करने के लिए जाना चाहिए तो अखिलेश यादव ने इस पर तुरंत रोक लगा दी, क्योंकि उनकी भक्ति प्रभु श्रीराम के प्रति नहीं थी, वे तो बाबर को मानने वाले लोग हैं...।"
भाषा आनन्द मनीषा रंजन
रंजन
1906 1612 अयोध्या