अंतिम शॉट में भ्रमित हुईं वंशिका, हाथ से फिसला स्वर्ण पदक
नमिता
- 19 Jun 2026, 10:21 PM
- Updated: 10:21 PM
नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हैरान करने वाली घटना में जूनियर महिला निशानेबाज वंशिका चौधरी आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में अंतिम शॉट लगाने से पहले भ्रमित हो गईं और इस गलती के कारण उनका पदक जीतने का सपना टूट गया।
वह स्वर्ण पदक और संभावित विश्व रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उनके इस भ्रम से मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।
बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (आईएसएसएफ) के अध्यक्ष लुसियानो रॉसी की मौजूदगी में अपनी पहली जूनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहीं वंशिका 191.3 के स्कोर के साथ आसानी से आगे चल रही थीं। वह अपनी साथी खिलाड़ी सेजल कांबली (189.7) से 1.6 अंक आगे थीं और अपने आखिरी शॉट के लिए तैयार थीं (एक ऐसा शॉट जो खराब स्कोर के बावजूद उन्हें स्वर्ण पदक दिला सकता था।
एक और भारतीय निशानेबाज हिमांशी, बुल्गारिया की मारिया अतानासोवा के साथ 187.6 के स्कोर पर तीसरे स्थान के लिए बराबरी पर थीं।
लेकिन एक चौंकाने वाली घटना में 21 वर्षीय वंशिका बिना हिले-डुले खड़ी रहीं और अपना आखिरी शॉट नहीं लगा पाईं, जिससे जूरी और रेंज अधिकारी हैरान रह गए जबकि पिस्टल टीम के नए कोच विवेक सिंह हैरान होकर यह सब देखते रहे।
सेजल जूनियर विश्व चैंपियन बनीं जबकि मारिया ने रजत और हिमांशी ने कांस्य पदक जीता। अगर वंशिका ने यह गलती नहीं की होती तो भारत पोडियम के तीनों स्थानों पर कब्जा कर सकता था।
उद्घोषक ने सभी स्कोर बताए और कहा कि मुकाबले के कड़े होने के कारण शूट-ऑफ हो सकता है। वंशिका ने इसे शूट-ऑफ का आदेश समझ लिया जबकि उन्हें अभी अपना आखिरी शॉट लगाना बाकी था।
आखिरकार वह चौथे स्थान पर रहीं।
प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी में शूट-ऑफ शॉट्स की एक अतिरिक्त सीरीज होती है जिसका इस्तेमाल समान स्कोर वाले निशानेबाजों के बीच टाई तोड़ने के लिए किया जाता है। इससे विजेता, पदक की स्थिति, अगले चरण में आगे बढ़ना या अंतिम रैंकिंग तय होती है।
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के महासचिव पवन कुमार सिंह ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि घोषणा को लेकर गलतफहमी के कारण वंशिका भ्रमित हो गईं।
सिंह ने पीटीआई को बताया, ''जब कोच ने बाद में वंशिका से बात की, तो उसने कहा कि उसने उस घोषणा को 'शूट-ऑफ' का आदेश समझा था, जिससे उसके मन में भ्रम पैदा हो गया। ''
उन्होंने कहा, ''कोच ने निशानेबाज को शॉट लेने का इशारा करने की कोशिश की क्योंकि प्रतिस्पर्धा के दौरान बोलकर कोचिंग देना मना है। कोच सिर्फ इशारा कर सकता है, बोल नहीं सकता। निशानेबाज की आंखें बंद थीं और वह ध्यान लगा रही थी क्योंकि उसे लग रहा था कि यह 'शूट-ऑफ' है। जब आखिरी शॉट लेने का आदेश दिया गया, तब भी वह आंखें बंद करके ध्यान लगाए रही और उसने अपने कोच की तरफ नहीं देखा। अगर उस दौरान उसने एक बार भी अपने कोच की तरफ देखा होता, तो वह स्थिति समझ जाती। उसे पक्का यकीन था कि यह 'शूट-ऑफ' है और इसी वजह से भ्रम हुआ। नियमों के मुताबिक जिम्मेदारी निशानेबाज की ही होती है। ''
जब उनसे पूछा गया कि क्या विरोध करने की कोई गुंजाइश है तो उन्होंने कहा, ''हम किस बात का विरोध करेंगे? यह निशानेबाज की ही गलती थी। ''
भाषा नमिता
नमिता
1906 2221 दिल्ली