ईरान वार्ता समाप्त, लेबनान में जारी संघर्ष से जुड़े मुद्दों के हल के लिए ''डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल'' पर सहमति
रंजन
- 22 Jun 2026, 10:21 AM
- Updated: 10:21 AM
ओबबुर्गेन (स्विट्ज़रलैंड), 22 जून (एपी) ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में हुईं उच्चस्तरीय वार्ताएं सोमवार को समाप्त हो गईं और इस दौरान ईरान एवं अमेरिका ने लेबनान में जारी संघर्ष से जुड़े मुद्दों के हल के लिए एक ''डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल'' (तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र) स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है।
मध्यस्थ देशों पाकिस्तान एवं कतर की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि इस 'तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र' में लेबनान की सरकार भी शामिल होगी और इसका उद्देश्य ''लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति के समझौते का पालन सुनिश्चित करना'' होगा।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए पर्याप्त साबित होगी या नहीं। इजराइल का लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा है और उसका कहना है कि उन चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए जो उत्तरी इजराइल पर हमले करते हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार तड़के स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशों से ''महत्वपूर्ण प्रगति'' हासिल हुई है।
अब्बास अराघची ने यह संदेश सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा किया।
पाकिस्तान, क़तर और ईरान तीनों देशों ने उच्चस्तरीय वार्ता के पहले दौर के समाप्त होने की पुष्टि की है। हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
अपने संदेश में अराघची ने कहा कि वार्ता में बनी सहमतियों की पहली वास्तविक परीक्षा लेबनान में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए गठित होने वाले 'तनाव नियंत्रण समन्वय तंत्र' की होगी।
ईरान ने इन वार्ताओं की सफलता को लेबनान में जारी लड़ाई की समाप्ति से जोड़ा है। वहीं इजराइल का कहना है कि वह लेबनानी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए। इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्ला उत्तरी इजराइल पर लगातार हमले कर रहा है, इसलिए उसके विरुद्ध सैन्य कार्रवाई जारी रखना आवश्यक है।
वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में और 60-दिवसीय कूटनीतिक प्रक्रिया के रूप में हुई है, जिसका उद्देश्य ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है। हालांकि, लेबनान में जारी संघर्ष अब भी प्रमुख अड़चनों में से एक बना हुआ है।
इस बीच, ईरान ने दावा किया कि उसने सप्ताहांत के दौरान फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो फ़ारस की खाड़ी का संकरा प्रवेश मार्ग है और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं अमेरिका ने कहा कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही।
स्विट्ज़रलैंड में रविवार को वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में हुई, जब तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और ईरान के राष्ट्रपति के संबंध में दिए गए बयान को लेकर आपत्ति जताई। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के राष्ट्रपति को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, '' ईरान को तुरंत अपने अत्यधिक भुगतान वाले प्रॉक्सी बलों को लेबनान में परेशानी पैदा करने से रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम ईरान पर फिर से बहुत कठोर हमला करेंगे, जैसा हमने पिछले हफ्ते किया था-इस बार और भी ज्यादा कठोर।''
सोशल मीडिया पर दिए गए इन बयानों ने ईरान के साथ वार्ता के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मध्यस्थ देश पाकिस्तान तथा क़तर के प्रयासों को जटिल बना दिया।
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने ट्रंप की टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा , ''उन्हें अपने बयानों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।''
उन्होंने कहा, '' हमारी सशस्त्र सेनाएं उनका जवाब अलग तरीके से देने के लिए तैयार हैं। वे बात करते रहें, कार्रवाई हम करते हैं।''
लेकिन बाद में अराघची ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा,''
पाकिस्तान और क़तर की अथक मध्यस्थता ने लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।''
उन्होंने कहा कि वार्ता की पहली 'वास्तविक परीक्षा' यह होगी कि क्या तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र लेबनान में जारी लड़ाई को रोकने में सफल हो पाता है या नहीं।
ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी वार्ताकारों स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर ने ईरान के प्रतिनिधियों मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और अब्बास अराघची के साथ लगभग 80 मिनट तक बैठक की।
बैठक के बाद पाकिस्तान और कतर ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड में सप्ताह के बाकी दिनों में वार्ताएं जारी रहेंगी।
एपी शोभना रंजन
रंजन
2206 1021 आकरा