पाकिस्तान के कराची में आतंकवादियों के हमले में छह लोगों की मौत
नेत्रपाल
- 28 Jun 2026, 10:54 PM
- Updated: 10:54 PM
कराची, 28 जून (भाषा) भारी हथियारों से लैस प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों द्वारा कराची में सिंध रेंजर्स के एक परिसर पर किए गए हमले में कम से कम तीन आतंकवादी और अर्धसैनिक बल के तीन जवान मारे गए। सेना ने रविवार को यह जानकारी दी।
सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, अक्टूबर 2024 के बाद बंदरगाह शहर कराची में यह पहला बड़ा आतंकवादी हमला था।
यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग हुए संगठन जमात-उल-अहरर के आतंकवादियों ने पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) के शिविर पर किया।
शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरे एक वाहन को सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग के मुख्य द्वार से टकरा दिया। इसके बाद वे परिसर में घुस गए और हथगोले फेंके, जिससे कई विस्फोट हुए।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अधिकारियों ने लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी और आसपास के कुछ रिहायशी इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही।
सेना ने बताया कि हमले में कम से कम तीन आतंकवादी मारे गए, जबकि एक अन्य आतंकवादी, जिसके अफगान नागरिक होने का संदेह है, को जिंदा पकड़ लिया गया। हालांकि, सेना ने उसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।
आईएसपीआर ने कहा, ''मुख्य द्वार पर विस्फोट करने के बाद हमलावरों ने परिसर की सुरक्षा घेराबंदी को भेदने की कोशिश की।''
हालांकि, रेंजर्स के जवानों ने उनके प्रयास को विफल कर दिया। कार्रवाई में तीन आतंकवादी मार गिराए गए, जबकि एक घायल आतंकवादी, जो अफगान नागरिक है, को पकड़ लिया गया।
इस बीच, शनिवार को कराची दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत पर "प्रॉक्सी तत्वों" के जरिए पाकिस्तान में शांति और स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
आईएसपीआर ने पुष्टि की कि आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में अर्धसैनिक बल के तीन जवान भी मारे गए।
आईएसपीआर के अनुसार, इलाके में अन्य आतंकवादियों की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षा से जुड़े एक भरोसेमंद सूत्र ने बताया कि विशेष सुरक्षा इकाई (एसएसयू) के कमांडो और आतंकवाद रोधी बल ने हमलावरों को मार गिराने और एक घायल हमलावर को पकड़ने में रेंजर्स की मदद की।
हमले के तुरंत बाद अधिकारियों ने पूरे परिसर को घेर लिया और आसपास की सभी संपर्क सड़कों को बंद कर दिया।
प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का धड़ा जमात-उल-अहरार हाल के वर्षों में मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सक्रिय रहा है, जहां उसने आम नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया है।
अक्टूबर 2024 के बाद से कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले कराची हवाई अड्डे के निकट हुए आत्मघाती विस्फोट में दो चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी। इस घटना की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी।
फरवरी 2023 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने कराची के शाहराह-ए-फैसल स्थित पुलिस मुख्यालय पर बड़ा आतंकवादी हमला किया था, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य हताहत हुए थे।
पिछले वर्ष के अंत से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस्लामाबाद लगातार आरोप लगाता रहा है कि काबुल की तालिबान सरकार टीटीपी को सुरक्षित पनाह दे रही है और वह पाकिस्तान में सीमा पार से हमले करवा रही है।
पाकिस्तान की सेना ने भी कई बार दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान में टीटीपी के ठिकानों और प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाते हुए अभियान चलाए हैं।
भाषा राखी नेत्रपाल
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