अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त महिला लाभार्थियों के खातों में अंतरित की गई: शुभेंदु
सुरेश
- 01 Jul 2026, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
कोलकाता, एक जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि महिलाओं को आर्थिक सहायता मुहैया कराने के लिए अन्नपूर्णा योजना के तहत पहली किस्त लगभग 1.1 करोड़ लाभार्थियों के खातों में अंतरित कर दी गई है।
शुभेंदु ने कहा कि इस योजना के लिए कुल 1.6 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 26 लाख आवेदनों को नागरिकता और अधिवास की स्थिति पर संदेह होने के आधार पर खारिज कर दिया गया है।
अधिकारी ने बताया कि योजना के पोर्टल पर अब तक पश्चिम बंगाल के करीब 1.3 करोड़ स्वीकृत लाभार्थियों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अभी तक राशि नहीं मिली है, उनके खातों में दिन खत्म होने तक पैसे भेज दिए जाएंगे।
उन्होंने कोलकाता स्थित नेताजी इंडोर स्टेडियम में योजना की औपचारिक शुरुआत करते हुए कहा, "जांच और छंटनी जरूरी थी, क्योंकि हम सरकारी खजाने से करदाताओं का पैसा गैर-भारतीयों को नहीं दे सकते।" इस कार्यक्रम में उन्होंने कुछ लाभार्थियों को प्रमाणपत्र भी सौंपे।
उन्होंने कहा, "हम सरकार की मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को बंद नहीं करेंगे और न ही किसी पात्र आवेदक को उसके अधिकारों से वंचित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई हर गारंटी को पूरा किया जाएगा। आज हम उन्हें हासिल करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े हैं।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार अन्नपूर्णा योजना के तहत पात्र महिलाओं को 3,000 रुपये की मासिक सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना ने राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना की जगह ली है।
बाईस जून को 2026-27 वित्त वर्ष के बाकी नौ महीनों के लिए पेश किए गए बजट में राज्य सरकार ने अन्नपूर्णा योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये आवंटित किए। इसके साथ ही महिलाओं को केंद्र में रखकर कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं की भी घोषणा की गई।
महिला, बाल विकास और समाज कल्याण विभाग को बजट में सबसे अधिक 52,308 करोड़ रुपये का आवंटन मिला, जिसका बड़ा हिस्सा महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजना पर खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों में अनुसूचित जाति वर्ग की 26.5 लाख से अधिक महिलाएं, अनुसूचित जनजाति वर्ग की करीब पांच लाख महिलाएं और दार्जिलिंग पहाड़ियों की गोरखा समुदाय की 1.2 लाख से अधिक महिलाएं शामिल हैं।"
उन्होंने बताया कि हाल ही में सरकार द्वारा आयोजित जन कल्याण शिविरों में मिले आवेदनों के आधार पर करीब 8.15 लाख नाम सूची में जोड़े गए हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी शरणार्थी, जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है, और वे लोग जिन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती देते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े न्यायाधिकरणों में अपील की है, उन्हें भी संबंधित प्राधिकरणों द्वारा उनके मामलों का निपटारा होने तक अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों की सूची में बनाए रखा गया है।
अधिकारी ने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के करीब दो करोड़ लाभार्थियों में लगभग 10 लाख ऐसे लोग थे, जो पुरुष थे। अब उन्हें सूची से हटा दिया गया है।" उन्होंने बड़ी संख्या में आवेदनों को खारिज किए जाने को सही ठहराते हुए यह बात कही।
उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को मजदूरी में होने वाले नुकसान की भरपाई और मां तथा शिशु के बेहतर पोषण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार केंद्र की ओर से मिलने वाले 5,000 रुपये के अलावा 16,000 रुपये और जोड़ेगी, जिससे इस वर्ग की महिलाओं को एकमुश्त 21,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, "अगस्त से हम सरकारी अस्पतालों में माताओं को पांच पोषण किट उपलब्ध कराएंगे।"
अधिकारी ने कहा कि महिलाओं के लिए राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा हेतु वर्तमान शून्य-मूल्य टिकट प्रणाली की जगह राज्य सरकार जल्द ही 'पिंक कार्ड' शुरू करेगी।
भाषा तान्या सुरेश
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