दिल्ली सरकार विश्व बैंक के सहयोग से 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' परियोजना शुरू करेगी: गुप्ता
अविनाश
- 03 Jul 2026, 03:50 PM
- Updated: 03:50 PM
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार विश्व बैंक के सहयोग से 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' परियोजना शुरू करेगी जो राष्ट्रीय राजधानी के सभी जिलों में इस साल से अगस्त 2033 तक लागू रहेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, राजधानी में वायु प्रदूषण की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए दिल्ली सरकार यह परियोजना शुरू कर रही है। यह पर्यावरण विभाग की सात वर्षीय महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे विश्व बैंक सहित बहुपक्षीय संस्थाओं के सहयोग से लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इसका उद्देश्य दिल्ली की वायु प्रदूषण न्यूनीकरण योजना को तेजी से लागू करना, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और 'विकसित भारत 2047' के विजन में योगदान देना है।
गुप्ता ने कहा कि कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 10 जुलाई को एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी जिसमें विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों की भूमिकाएं तय की जाएंगी और कार्यक्रम के प्रभावी व समयबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा होगी।
उन्होंने बताया, "यह परियोजना सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक दिल्ली के सभी जिलों में लागू रहेगी। इसकी कुल अनुमानित लागत 8,300 करोड़ रुपये है, जिसमें 65 प्रतिशत वित्तीय सहायता विश्व बैंक उपलब्ध कराएगा, जबकि 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार वहन करेगी।"
गुप्ता ने कहा कि इस परियोजना के तहत परिवहन, सड़क की धूल, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण, अपशिष्ट, ठोस कचरा प्रबंधन, उद्योग, हरित क्षेत्र और जल प्रदूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रदूषण नियंत्रण की योजना नहीं है, बल्कि दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और अनुकूल पर्यावरण उपलब्ध कराने की दिशा में दीर्घकालिक निवेश है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के तहत दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत बनाया जाएगा और परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसके तहत आधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी, डेटा विश्लेषण और एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी।
गुप्ता ने कहा, "परियोजना का दूसरा स्तंभ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित है। इसके तहत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाया जाएगा तथा वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रदूषण जांच (पीयूसी) प्रणाली विकसित की जाएगी।"
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