गढ़वाली के बारे में दिए गए बयान से उठे विवाद के बाद भाजपा विधायक ने माफी मांगी
संतोष
- 04 Jul 2026, 07:53 PM
- Updated: 07:53 PM
कोटद्वार, चार जुलाई (भाषा) पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर हाल में दिए गए अपने बयान के कारण उठे विवाद के बाद भाजपा विधायक दिलीप रावत ने शनिवार को कहा कि सोशल मीडिया पर उनकी बात को अधूरा और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, लेकिन यदि उनकी बात से गढ़वाली की गरिमा और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए लाख बार माफी मांगने को तैयार हैं।
लैंसडौन से विधायक रावत का हाल में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वह कहते सुनाई दे रहे हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति कभी क्रांति नहीं कर सकता क्योंकि वह चीजों का विश्लेषण करता है और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कहीं से भी बुद्धिमान नहीं थे।
वायरल वीडियो पर विवाद के बाद विधायक ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सोशल मीडिया पर उनके वक्तव्य को अधूरा और तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया गया, जबकि उनका उद्देश्य केवल वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के संघर्ष, क्रांतिकारी सोच, विरोध और देश की आजादी के लिए किए गए उनके अद्वितीय योगदान का उल्लेख करना था।
रावत ने कहा कि कुछ दिन पूर्व देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पौड़ी के रिखणीखाल के समाजसेवी एवं प्रसिद्ध उद्यमी विजय सुंद्रियाल का उदाहरण देते हुए कहा था कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने फल प्रसंस्करण आधारित उद्योग स्थापित किया, जिसने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने और पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विधायक ने कहा कि अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा था कि कई बार जो लोग किसी कार्य को करने से पहले अत्यधिक सोच-विचार करते हैं, वे निर्णय लेने में पीछे रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में उन्होंने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का उदाहरण देते हुए कहा था कि उन्होंने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के अंग्रेज सरकार के आदेश को मानने से तत्काल इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि यदि वह (गढ़वाली) उस समय अधिक सोच-विचार करते, तो संभवतः इतिहास कुछ और होता।
रावत ने कहा कि उनके बयान का आशय किसी भी प्रकार से वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की गरिमा या सम्मान को ठेस पहुंचाना नहीं था।
लेकिन उन्होंने कहा, ''यदि मेरे वक्तव्य से उनकी गरिमा, स्वाभिमान अथवा सम्मान को लेशमात्र भी ठेस पहुंची है, तो मैं एक बार नहीं, बल्कि लाख बार माफी मांगने को तैयार हूं।'
बयान को लेकर उन पर हमलावर हुई कांग्रेस को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया और कहा कि कांग्रेस को उनसे माफी मांगने के लिए कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और माफी उन्हें नहीं बल्कि कांग्रेस को मांगनी चाहिए ।
इस संबंध में कोटद्वार के वरिष्ठ लेखक, समाजसेवी एवं कांग्रेस नेता कुंवर सिंह कर्मठ के एक प्रकाशित लेख का हवाला देते हुए रावत ने दावा किया कि 1979 में नारायण दत्त तिवारी के कोटद्वार आगमन पर गढ़वाली को उनसे मिलने नहीं दिया गया था जिसके विरोध में उन्होंने मालवीय उद्यान में एक रेहड़ी पर खड़े होकर ''एनडी तिवारी गो बैक' के नारे लगाए थे।''
उन्होंने आरोप लगाया कि एक कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा रेहड़ी को लात मारे जाने से गढ़वाली नीचे गिर गए जिसके बाद उन्हें पहले कोटद्वार अस्पताल और फिर दिल्ली ले जाया गया।
विधायक ने दावा किया कि इस घटना के बाद गढ़वाली कभी खड़े नहीं हो पाए और अंततः उनका निधन हो गया। विधायक ने कहा कि इस घटना के लिए कांग्रेस नैतिक रूप से जिम्मेदार है ।
भाषा सं दीप्ति संतोष
संतोष
0407 1953 कोटद्वार