केरल में एनेस्थीसिया के बाद बच्चे की मौत मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित
नरेश
- 13 Jul 2026, 01:02 PM
- Updated: 01:02 PM
कन्नूर (केरल), 13 जुलाई (भाषा) केरल के पय्यन्नूर स्थित एक निजी अस्पताल में होंठ की चोट पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत के मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पय्यन्नूर के पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में चल रही जांच में स्वास्थ्य विभाग से विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का अनुरोध किया गया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे की मौत एनेस्थीसिया देने में किसी चूक के कारण हुई थी या नहीं।
अधिकारियों ने बताया कि अनुरोध के बाद कन्नूर के जिला चिकित्सा अधिकारी (डीएमओ) ने परियारम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड गठित किया। इस बोर्ड में बाल रोग विशेषज्ञों और पय्यन्नूर तालुक अस्पताल के अधीक्षक को भी शामिल किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल बोर्ड पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एनेस्थीसिया देने से जुड़े रिकॉर्ड, उपलब्ध कराए गए उपचार और बच्चे के चिकित्सकीय इतिहास की जांच करेगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौत के पीछे कोई चिकित्सकीय लापरवाही थी या नहीं।
पुलिस के अनुसार, बोर्ड यह भी जांच करेगा कि प्रक्रिया के लिए एनेस्थीसिया देना आवश्यक था या नहीं और उसकी मात्रा उचित थी या नहीं, खासकर इसलिए क्योंकि बच्चे का वजन कथित तौर पर कम था।
अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस यह फैसला करेगी कि मामले में और चिकित्सकों को आरोपी बनाया जाए या नहीं।
एरामम निवासी बच्चा देवांश शौर्य पांच जुलाई को खेलते समय होंठ पर चोट लगने से घायल हो गया था। उसे पय्यन्नूर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने एनेस्थीसिया देकर घाव पर टांके लगाने की सलाह दी थी।
परिवार की शिकायत के अनुसार, एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चा बेहोश हो गया और उसे कन्नूर के एक अन्य अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अंजलि पोडुवल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने उपचार में शामिल बाल रोग विशेषज्ञ और प्लास्टिक सर्जन को भी पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शनिवार को बच्चे के परिजनों ने शव के साथ अस्पताल के सामने प्रदर्शन किया और उपचार में शामिल सभी चिकित्सकों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
पुलिस ने परिजनों से बातचीत की और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
घटना के बाद अस्पताल ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चे को हृदयाघात हुआ था और उसे तत्काल जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था।
भाषा मनीषा नरेश
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