महिला के बेडरूम में पुलिस का जबरन घुसना निजता का उल्लंघन : अदालत
मनीषा
- 13 Jul 2026, 03:35 PM
- Updated: 03:35 PM
मुंबई, 13 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने कहा कि पुलिस का उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना एक महिला के बेडरूम में जबरन घुसना और उसका मोबाइल फोन जब्त करना पीड़िता की निजता और गरिमा का उल्लंघन था। पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को नागपुर की रहने वाली पीड़िता को 10,000 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की पीठ ने पिछले हफ्ते सुनाए गए फैसले में कहा कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न एवं अटूट हिस्सा है, जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
फैसले की प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 26 वर्षीय याचिकाकर्ता को दो महीने के भीतर 10,000 रुपये का भुगतान करे। उसने स्पष्ट किया कि सरकार हर्जाने की राशि सीधे उस पुलिस अधिकारी से वसूल सकती है, जो महिला की निजता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार है।
पीठ ने कहा, "कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी नागरिक के घर में, खासकर किसी महिला के बेडरूम में घुसना और जबरदस्ती उसका मोबाइल फोन जब्त करना उसकी निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।"
पीठ ने पुलिस की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह कार्रवाई एक आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में की गई थी। उसने कहा कि यह दलील विधायिका की ओर से बनाए गए अनिवार्य कानूनी उपायों पर अमल न किए जाने को सही नहीं ठहरा सकती।
पीठ ने कहा कि जांच एजेंसी से कानून के दायरे में रहकर काम करने की उम्मीद की जाती है। उसने कहा कि जांच का मकसद किसी गैर-कानूनी तलाशी या जब्ती को जायज नहीं ठहरा सकता।
नागपुर के सावनेर की रहने वाली याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पुलिस ने एक मामले की जांच के बहाने गैर-कानूनी तरीके से उसके घर और बेडरूम में प्रवेश किया और कानून की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
वहीं, पुलिस का दावा था कि वह याचिकाकर्ता से एक कार हादसे के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए उसके घर पहुंची थी।
महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना नोटिस जारी किए बार-बार उसके घर आकर पूछताछ करके उसे और उसके पति को परेशान किया।
उसने कहा कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया और दो दिन तक उसे अपने पास रखा।
महिला ने दावा किया कि इस मामले में न तो उसे और न ही उसके पति को आरोपी बनाया गया है।
भाषा पारुल मनीषा
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