'असत्य और हिंसा' मोदी सरकार के मूल सिद्धांत : राहुल गांधी
दिलीप
- 18 Jul 2026, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से ''हटाने'' को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और पार्टी नेता राहुल गांधी ने कहा कि ''असत्य और हिंसा'' नरेन्द्र मोदी सरकार के मूल सिद्धांत हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि यह शर्म की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में दुनिया की सबसे अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक पार्टी ''शासन'' कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट करके कहा, ''111 दिन तक मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो जी. डी. अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलंपिक पहलवान हों, हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फिर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन, इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख्शा।''
उन्होंने भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ''इनकी नजर में कोई भी अगर आवाज उठाता है, तो वह राष्ट्र विरोधी है, परजीवी है। जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।''
खरगे ने कहा, ''कोटा और देहरादून से 'छात्रों की गूंज' का आगाज हो चुका है…यह दिल्ली की दहलीज तक जरूर पहुंचेगी।''
गांधी ने कहा कि जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर थे, तब उन्हें जंतर-मंतर से हटाया जाना ''गलत'' है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के मूल सिद्धांत ''असत्य और हिंसा'' हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''सोनम वांगचुक जी को जंतर-मंतर से उस समय हटाया जाना गलत है, जब वह शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर बैठे थे।''
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा कि प्रश्न पत्र लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और विद्यार्थियों की आत्महत्याएं भारत के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।''
उन्होंने कहा कि कोई भी ताकत भारत के विद्यार्थियों और उन लोगों को, जो उनसे प्रेम करते हैं और उन पर विश्वास करते हैं, इन मुद्दों को उठाने से रोक नहीं सकती।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने 'एक्स' कहा, ''हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी आवाज उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का बुनियादी अधिकार देता है। लेकिन आज गृह मंत्रालय का रवैया देखकर लगता है कि उसने इसी संवैधानिक अधिकार को अपना निशाना बना लिया है।''
खेड़ा ने कहा, ''दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, और कल ही इसी मंत्रालय ने दिल्ली को नया पुलिस आयुक्त दिया है। अगर आज की बर्बर कार्रवाई आयुक्त साहब का पहला संदेश है, तो इससे साफ पता चलता है कि उनकी वफादारी संवैधानिक कर्तव्य से ज्यादा सत्ता के प्रति है।''
उन्होंने कहा, ''महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटना हो या पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करना- यह सरकार बार-बार दिखा चुकी है कि उसे न संविधान की इज्जत है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादा की।''
कांग्रेस नेता ने कहा, ''आज की घटना ने एक बार फिर इस सोच को बेनकाब कर दिया है। इस सरकार के लिए शांतिपूर्ण विरोध किसी नागरिक का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि ''कानून एवं व्यवस्था'' की एक समस्या है, जिसे डंडे के जोर पर कुचल देना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज दुनिया की सबसे बड़ी अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक दल के कब्जे में है।''
उनकी यह टिप्पणी तब आयी, जब जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद शनिवार को वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने इसके लिए चिकित्सा सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया है।
नयी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और चिकित्सकों की निगरानी में उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि सोनम वांगचुक को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह और उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ''आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए स्थानांतरित किया गया।''
बयान में कहा गया कि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी देर के लिए हंगामे की स्थिति बनी। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने अधिकतम संयम बरतते हुए कार्रवाई सफलतापूर्वक पूरी की।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने और प्रदर्शन स्थल जल्द से जल्द शांतिपूर्वक खाली करने की अपील भी की।
पुलिस की कार्रवाई के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बलपूर्वक कार्रवाई की।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दिल्ली पुलिस ने मेरे साथ मारपीट की और मुझे हिरासत में लिया।''
उन्होंने कहा कि वह तरोताजा होने के लिए एक मित्र के घर गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया।
कॉजपा ने 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वांगचुक को सफेद चादर में लपेटकर प्रदर्शन स्थल से ले जाते हुए दिखाया गया।
कॉजपा ने कहा, ''20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक कमजोर वृद्ध व्यक्ति को सफेद चादर में लपेटकर दिल्ली पुलिस उठा ले गई। यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात है।''
वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन कार्यकर्ता 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वे कॉजपा के नेतृत्व में आयोजित उस प्रदर्शन के समर्थन में अनशन कर रहे हैं, जिसमें नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े छात्रों की कथित मौतों के मामले में कार्रवाई की मांग की जा रही है।
पिछले तीन सप्ताह के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती दिखी है।
कॉजपा पिछले 25 दिनों से अधिक समय से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
कांग्रेस पहले ही वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह कर चुकी है और उसने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी जताई थी।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप
1807 1903 दिल्ली