भूस्खलन के कारण केदारनाथ मार्ग पर घोड़ा-खच्चर सेवा बाधित, मानसरोवर यात्रियों को धारचूला में रोका गया
सिम्मी
- 18 Jul 2026, 10:07 PM
- Updated: 10:07 PM
देहरादून, 18 जुलाई (भाषा) मौसम विभाग द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में अगले कुछ दिनों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बीच शनिवार को केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन के कारण घोड़ा-खच्चर सेवा बाधित हो गई, जबकि गुंजी मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से कैलाश-मानसरोवर यात्रा के चौथे जत्थे को धारचूला आधार शिविर में रोक दिया गया।
देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले कुछ दिनों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की शनिवार को चेतावनी दी जिसके बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
मौसम विभाग ने नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए रविवार को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। वहीं, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और बागेश्वर जिलों में रविवार को भारी से बहुत भारी वर्षा तथा गरज-चमक के साथ अत्यंत तेज बारिश की आशंका के मद्देनजर 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।
सोमवार यानी 20 जुलाई के लिए देहरादून, हरिद्वार और टिहरी जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। सोमवार के लिए नैनीताल, उत्तरकाशी और पौड़ी जिलों में भी 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है।
देहरादून और बागेश्वर जिलों में 21 जुलाई के लिए 'ऑरेंज अलर्ट', जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में 22 जुलाई के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है।
प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने तथा भूस्खलन की आशंका वाले मार्गों पर आवश्यक मशीनरी एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और नागरिकों से इस दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, यात्रा पर निकलने से पहले मौसम एवं सड़कों की स्थिति की जानकारी लेने तथा भारी वर्षा के दौरान नदी-नालों, गदेरों (बरसाती जल निकाय) और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
इस बीच, केदारनाथ पैदल मार्ग पर गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच शुक्रवार को पहाड़ी से बड़े पत्थर (बोल्डर) और मलबा गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया। इसके बाद घोड़ा-खच्चर और डोली सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गईं।
रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि पत्थर गिरने की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए। दलों ने मलबा हटाकर पैदल यात्रियों के लिए मार्ग खोल दिया है लेकिन घोड़ा-खच्चर सेवा अब भी बाधित है।
इस बीच, पिथौरागढ़ के धारचूला आधार शिविर के प्रभारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि गुंजी मार्ग पर गरबाधार में भूस्खलन होने के कारण कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रियों के 50 सदस्यीय चौथे जत्थे को धारचूला आधार शिविर में ही रोक दिया गया है।
भाषा दीप्ति
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