नेताओं की अपील के बाद आइसा कार्यकर्ताओं ने 23 दिन का अनशन समाप्त किया
गोला
- 20 Jul 2026, 11:09 AM
- Updated: 11:09 AM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) विपक्षी सांसदों, नागरिक संगठन के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल की अपील के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर 23 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन सोमवार को समाप्त कर दिया। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे आंदोलन को संसद और जन अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे आइसा के कार्यकर्ता नेहा, मनीष और आमीन ने सोमवार को अपना 23 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को संसद के मानसून सत्र में उठाया जाएगा और उन्हें राजनीतिक तथा जन अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सदस्य मनोज झा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद अमरा राम, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, राजाराम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, शिक्षाविद अतुल सूद तथा अभिनेता प्रकाश राज और शबाना आज़मी शामिल थे।
छात्रों से अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा, ''यह अनशन तोड़ना नहीं है, बल्कि संघर्ष के इस चरण का समापन है।''
मनोज झा ने कहा कि सरकार को ''हर मोर्चे पर बेनकाब'' कर छात्रों ने ''बहुत बड़ी उपलब्धि'' हासिल की है।
शबाना आज़मी ने कहा, ''हम अपनी 'जेन-ज़ेड' पीढ़ी के लिए बेहतर नहीं कर सके, लेकिन आप लोगों ने हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है।''
राजाराम सिंह ने छात्रों से कहा, ''आज से आपका संघर्ष लोकतंत्र के मंदिर संसद में भी गूंजेगा। आपने पूरे विपक्ष को संघर्ष का रास्ता दिखाया है।''
आइसा के अनुसार, 23 दिनों तक चले अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान तीनों कार्यकर्ताओं के शरीर का वजन 12 प्रतिशत से अधिक घट गया था। बेहद कम रक्त शर्करा स्तर और गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।
छात्र संगठन ने कहा कि अब वह संसद के मानसून सत्र के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ देशव्यापी एक माह का अभियान चलाएगा।
संगठन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की उसकी मांग भी जारी रहेगी।
आइसा के कार्यकर्ता 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक आंदोलन के तहत अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल हैं।
भाषा तान्या सुरभि गोला
गोला
2007 1109 दिल्ली