संसद की ओर मार्च कर रहे कॉजपा के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, अभिजीत दीपके हिरासत में
नेत्रपाल
- 20 Jul 2026, 03:38 PM
- Updated: 03:38 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) परीक्षा पत्र लीक के विरोध में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के संसद मार्च के दौरान सोमवार को पुलिस ने हजारों की संख्या में जुटे युवाओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
विरोध प्रदर्शन तेज होने के कारण मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात ठप हो गया।
संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
दास ने कहा, ''पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई कर रही है और उन्हें पीट रही है, सांसदों से अनुरोध है कि वे सड़कों पर छात्रों के समर्थन में खड़े हों।''
स्कूल की वर्दी पहने कुछ प्रदर्शनकारियों समेत अन्य लोगों के मध्य दिल्ली में प्रवेश करने, अंदरूनी सड़कों से निकलने और संसद के जितना संभव हो सके, करीब पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने की कोशिश के दौरान झड़पें हुईं। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
व्यापक बैरिकेडिंग के बावजूद वे नहीं रुके। वे कई किलोमीटर पैदल चले, बीच-बीच में प्रदर्शनकारियों के समूहों में शामिल होकर नारे लगाए, उचित अवसर की प्रतीक्षा में रुकते रहे ताकि बैरिकेड तोड़ सकें, और कई स्थानों पर बैरिकेड के कई स्तरों को पार करने में सफल रहे।
कुछ किलोमीटर दूर, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने चिकित्सा अधीक्षक से अनुरोध किया कि उन्हें ''भले ही अस्थायी रूप से'' अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे कॉजपा के संसद मार्च में भाग ले सकें। उन्होंने कहा कि वे ''पूरी तरह ठीक'' महसूस कर रहे हैं और उनके सभी स्वास्थ्य संबंधी मानक सामान्य हैं।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और संसद मार्ग थाने के पास सुरक्षाबलों द्वारा अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस को गोले छोड़े गए। इलाके के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया गया।
संसद के मानसून सत्र का सोमवार को पहला दिन भी था। जंतर-मंतर से शुरू हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
नयी दिल्ली जिले में अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पड़ोसी जिलों से पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ सुरक्षा दोगुनी कर दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि स्थिति के बिगड़ने पर रिजर्व में रखे गए अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां को भी तैनात किया गया।
एहतियात के तौर पर मोट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने के बाद कई यात्री अंदर ही फंस गए।
राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए दर्जनों प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर एकत्र हुए और उन्होंने "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए।
इससे पहले दिन में, पुलिस ने मार्च को उस समय रोक दिया जब जुलूस कनॉट प्लेस इलाके में पहुंचा और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में बिखर गए, और कई लोग धुएं से बचने के लिए सड़कों पर भागने लगे।
भारी सुरक्षा तैनाती के बीच, छोटे समूह नजदीकी चौराहों पर फिर से एकत्र हुए और नारेबाजी जारी रखी, जबकि पुलिस ने मार्च को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए हुए थे।
वांगचुक को हिरासत में लिए जाने और अस्पताल ले जाए जाने के बाद से भूख हड़ताल कर रहे दीपके ने कहा, ''हमारी मांगें स्पष्ट हैं: धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए, और सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।''
महाराष्ट्र के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह केवल प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली आया है। उसने शिक्षा को देश के विकास की नींव बताया और आरोप लगाया कि अगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो व्यवस्था खराब हो जाएगी।
उसने कहा, ''हम यहां केवल जवाबदेही की मांग करने और यह सुनिश्चित करने आए हैं कि छात्रों को वह शिक्षा मिले जिसके वे हकदार हैं।''
सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे बिहार के व्यक्ति ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी आवाज उठाने और अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए थे। उसने कहा कि कई युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिताए हैं और वे पारदर्शिता तथा जवाबदेही के हकदार हैं।
कॉजपा ने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए उनसे संपर्क किया है और उसके दो प्रवक्ता अपनी मांगें रखने के लिए केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा से मुलाकात करेंगे।
हालांकि, बातचीत को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी और नीट यूजी पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा की अनुमति न देने के लिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद विधेयकों की घोषणा करने और उन्हें पारित कराने का नोटिस बोर्ड नहीं हो सकती।
थरूर ने पुराने संसदीय सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष अपनी बात रखे, क्योंकि सरकार अपनी बात मनवा ही लेती है। उन्होंने कहा कि संसद वही मंच है, जहां जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ बुलंद करते हैं और उनकी समस्याओं को खुलकर उठाते हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग करने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की और मांग की कि केंद्र युवाओं की बात सुने और उन पर लाठीचार्ज का आदेश न दे।
केजरीवाल ने 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में सरकार से "अहंकार छोड़ने और युवाओं की बात सुनने" की अपील की।
उन्होंने कहा, "देश का पूरा युवा जंतर-मंतर पर लाखों की संख्या में एकत्र हुआ है। उनकी बात सुनने के बजाय सरकार उन पर लाठीचार्ज का आदेश दे रही है। यह सही नहीं है।"
इससे पहले सोमवार को, सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण मानक स्थिर हैं लेकिन उनके रक्त मानकों पर निगरानी की आवश्यकता है।
अस्पताल द्वारा सुबह 10 बजे जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा गया, "सोनम वांगचुक को वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में व्यापक चिकित्सा देखभाल मिल रही है।"
भाषा नोमान
नोमान नेत्रपाल
नेत्रपाल
2007 1538 दिल्ली