त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव शौचालय में फंदे से लटका मिला : मुख्यमंत्री माणिक साहा
दिलीप
- 20 Jul 2026, 10:28 PM
- Updated: 10:28 PM
(फोटो के साथ)
अगरतला, 20 जुलाई (भाषा) त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ का शव सोमवार को पुलिस मुख्यालय स्थित उनके आधिकारिक कक्ष के शौचालय में फंदे से लटका हुआ मिला। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने यह जानकारी दी।
विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस ने लगभग 18 वर्षों तक पूर्वोत्तर राज्य में विभिन्न पदों पर सेवाएं देने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वर्ष 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी धनखड़ 60 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और एक पुत्र हैं, जो कनाडा में रहते हैं।
धनखड़ अपने पद से 11 महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। स्थायी डीजीपी को उनकी आयु की परवाह किए बिना कम से कम दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल मिलता है। उन्हें पिछले वर्ष राज्य का पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया है और उसे उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित उनके पैतृक निवास ले जाया जाएगा।
साहा ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ''मैं त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ के दुखद निधन से बेहद स्तब्ध और दुखी हूं। उनका शव आज आधिकारिक कक्ष के शौचालय में फंदे से लटका हुआ मिला।''
उन्होंने बताया कि 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी को तुरंत अगरतला स्थित जीबीपी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें 'अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत' घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''इस अत्यंत दुख की घड़ी में मैं शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। दिवंगत आत्मा को शांति मिले और ईश्वर परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति और साहस प्रदान करें।''
इस बीच, त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए त्रिपुरा उच्च न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की।
चौधरी ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ''डीजीपी कई कारणों से दबाव में थे। हम मांग करते हैं कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जांच के लिए त्रिपुरा उच्च न्यायालय की निगरानी में एसआईटी गठित की जाए और इसके लिए कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई जाए।''
चौधरी ने कहा, ''श्री धनखड़ ने उप मंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) से लेकर डीजीपी के पद तक का सफर तय किया, जो उनकी क्षमता, ईमानदारी और अपने दायित्वों के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। मुझे नहीं लगता कि इतना ईमानदार और अनुभवी अधिकारी किसी गंभीर कारण के बिना ऐसा कदम उठा सकता है। हमने एक अच्छे पुलिस अधिकारी को खो दिया है।''
चौधरी ने कहा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग करती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने 'रहस्यमय परिस्थितियों' में डीजीपी की मौत पर शोक व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, '' श्री अनुराग धनखड़ राज्य के सबसे उत्कृष्ट और दक्ष अधिकारियों में से एक थे। पूरे देश में यह पहली घटना है कि डीजीपी रैंक का कोई अधिकारी वर्दी में पुलिस मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में मृत पाया गया है। सरकार को उनकी मौत से जुड़े रहस्य से पर्दा उठाना चाहिए।''
रॉय बर्मन ने उनकी मौत की परिस्थितियों की उच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
वर्ष 2003-04 में कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सेवाएं दे चुके धनखड़ अपने साथी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच भी काफी सम्मानित थे।
पूर्व आईपीएस अधिकारी भानुपद चक्रवर्ती ने कहा, ''डीजीपी के रूप में अनुराग धनखड़ पेशेवर कामकाज में बेहद सख्त थे, लेकिन उनका स्वभाव बहुत उदार था। उन्होंने कभी अधीनस्थ अधिकारियों के साथ अन्याय नहीं किया। वह कभी-कभी हमें डांटते जरूर थे, लेकिन बड़ी गलती के बिना कभी कोई कठोर निर्णय नहीं लेते थे।''
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2007 2228 अगरतला