जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में नेकां का प्रदर्शन
नेत्रपाल
- 20 Jul 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया तथा केंद्र शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।
हालांकि, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुए इस प्रदर्शन पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च की वजह से ज्यादा ध्यान नहीं जा सका।
जम्मू से सुबह पहुंचे उमर कॉजपा के विरोध-प्रदर्शन की वजह से पुलिस की भारी तैनाती के कारण जंतर-मंतर पर विरोध स्थल तक नहीं पहुंच पाए।
नेकां के करीब 100 प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर इकट्ठे हुए, जिन पर ''अपना वादा पूरा करो'' और ''पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो'' जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बाद में, मुख्यमंत्री कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रस्तावित एक संगोष्ठी में शामिल होने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। ''राज्य का दर्जा बहाल करो'' लिखी जैकेट पहने उमर अब्दुल्ला अशोक रोड पर सड़क किनारे बैठ गए, जहां कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल कुछ युवा भी उनके साथ जुड़ गए।
प्रदर्शनकारियों ने ''मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?'' जैसे नारे भी लगाए।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके समर्थक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास जब धरना दे रहे थे, तब पुलिस ने कथित तौर पर वहां जमा हो रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
बाद में, पत्रकारों से बातचीत में उमर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।
उन्होंने कहा, ''यह शर्मनाक है कि यहां बाकी लोगों के साथ हमें भी आंसू गैस का निशाना बनाया गया।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम करीब 100 समर्थकों के साथ दिल्ली आए थे ताकि केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर सकें, लेकिन यहां भी हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।''
उमर ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से न्याय की मांग को लेकर आए युवाओं पर भी आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा, ''नीट परीक्षा के दौरान उन्हें परेशान किया गया। वे तनाव और दबाव में थे और चाहते हैं कि कोई इसकी जिम्मेदारी ले। लेकिन आज उन पर बेरहमी से आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। यह बहुत शर्मनाक है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार को संसद के दोनों सदनों और उच्चतम न्यायालय के समक्ष किए गए स्पष्ट वादों की याद दिलाने के लिए किया गया।
उन्होंने कहा, ''हम केंद्र सरकार को याद दिलाने के लिए दिल्ली आए हैं कि उसने उच्चतम न्यायालय और जनता से वादा किया था कि चुनाव के बाद जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।''
उमर ने कहा, ''हमें बार-बार बताया जाता है कि उचित समय आने पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि वह उचित समय कब आएगा। देश के दूरदराज के हिस्से से आने के कारण हमारी आवाज को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए हमें आज यहां प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।''
पटेल चौक के पास भारी जाम में फंसने के बाद उमर अब्दुल्ला ने बाद में ऑटो रिक्शा से पृथ्वीराज रोड स्थित जम्मू कश्मीर हाउस का रुख किया।
फारूक अब्दुल्ला ने मोदी सरकार से क्षेत्र की जनता के लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करने की अपील की।
उन्होंने कहा, ''हम पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए लड़ रहे हैं, जिसका वादा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने किया था।''
फारूक ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि सरकार जनता की इच्छाओं का सम्मान करेगी, देश के हित में काम करेगी, लद्दाख के मुद्दों का समाधान करेगी तथा बिना किसी और देरी के राज्य का दर्जा बहाल करेगी।''
जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को केंद्र को उसका वादा याद दिलाने के लिए दिल्ली आना पड़ा।
उन्होंने कहा, ''आपने जम्मू-कश्मीर के लोगों से वादा किया था कि चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। आज करीब डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन न प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री ने अपना वादा पूरा किया है।''
चौधरी ने कहा कि नेकां, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए आश्वासन को केंद्र सरकार को याद दिलाने के लिए दिल्ली आए हैं।
उन्होंने कहा, ''आपने यह वादा संसद में किया, उच्चतम न्यायालय में किया और जम्मू-कश्मीर के हर बच्चे से किया कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। वह उचित समय आखिर कब आएगा?''
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। दिसंबर 2023 में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र के इस फैसले की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए कहा था कि जम्मू कश्मीर का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
भाषा
शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल
2007 2132 दिल्ली