इटर्नल का पहली तिमाही में शुद्ध लाभ लगभग चार गुना होकर 92 करोड़ रुपये
अजय
- 22 Jul 2026, 05:04 PM
- Updated: 05:04 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) जोमैटो और ब्लिंकिट का संचालन करने वाली कंपनी इटर्नल लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ लगभग चार गुना होकर 92 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 25 करोड़ रुपये था।
कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसकी परिचालन आय बढ़कर 20,211 करोड़ रुपये हो गई जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 7,167 करोड़ रुपये थी। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 20,314 करोड़ रुपये रहा जबकि एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह 7,433 करोड़ रुपये था।
कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अक्षांत गोयल ने कहा कि खाद्य आपूर्ति मंच जोमैटो के शुद्ध ऑर्डर मूल्य (एनओवी) में लगातार चौथी तिमाही में तेजी दर्ज की गई और यह सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 10,769 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) मंच ब्लिंकिट का एनओवी 86 प्रतिशत बढ़कर 17,132 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रेस्तरां व फिल्म की टिकट की बुकिंग से जुड़े मंच 'डिस्ट्रिक्ट' का एनओवी 60 प्रतिशत बढ़कर 3,218 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
ब्लिंकिट के एनओवी में वृद्धि पर इटर्नल समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अलबिंदर सिंह ढींडसा ने कहा, ''यह मुख्य रूप से मौसमी कारकों के अनुरूप रहा और एनओवी वृद्धि हमारी अपेक्षाओं के मुताबिक थी। हम दीर्घकालिक वृद्धि के तीन प्रमुख स्तंभों उत्पाद श्रृंखला के विस्तार, भौगोलिक विस्तार और मांग को सघन बनाने- पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए हैं।''
ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के असर पर उन्होंने कहा कि फिलहाल कंपनी को इसका कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं दिख रहा है।
उन्होंने कहा, ''कुछ चुनिंदा कच्चे माल की लागत पर मुद्रास्फीतिक दबाव दिखना शुरू हुआ है लेकिन अब तक इसका उत्पादन या ब्रांड की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है।''
जोमैटो को नए मंच 'टॉइंग' और 'ओनली' से मिल रही प्रतिस्पर्धा पर इटर्नल के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने कहा, ''इसका असर सीमित रहा है। ये मंच उन्हीं रेस्तरां की सेवाएं दे रहे हैं, आपूर्ति का समय समान या अधिक है और कम कमीशन व 'डिलिवरी' शुल्क के आधार पर मेन्यू कीमतें कम रखी गई हैं। इससे राजस्व का अंतर और अधिक अस्थिर हो जाता है। इससे कोई नया उपयोग या मांग पैदा नहीं हो रही है।''
उन्होंने कहा कि इन मंचों की ओर ग्राहकों का आकर्षण पूरी तरह कीमत पर आधारित है और केवल कीमत पर आधारित मांग, टिकाऊ कारोबारी अर्थशास्त्र न होने पर लंबे समय तक नहीं टिकती।
भाषा निहारिका अजय
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