हमारे बच्चे सुरक्षा के हकदार हैं, उन्हें 'खलनायक' के तौर पर नहीं दिखाया जाना चाहिए: गीतांजलि आंग्मो
सुरेश
- 23 Jul 2026, 03:43 PM
- Updated: 03:43 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने बृहस्पतिवार को कहा कि छात्रों की छवि को नकारात्मक रूप में दिखाया जाना ''बेहद दुखद'' है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसा के आरोपों के बीच उन्होंने सवाल किया कि ''छात्रों की चिंताओं को सुनने के बजाय उनकी नीयत पर सवाल उठाना आसान क्यों है''।
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल) की सह-संस्थापक आंग्मो ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में अपील की कि जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है, उन्हें बिना किसी सबूत के दिल्ली में कहीं और हुई हिंसा की घटनाओं से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''एक शिक्षक होने के नाते मीडिया में छात्रों की छवि खराब होते देखना बेहद दुखद है।''
उन्होंने कहा, ''जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और अगर दिल्ली में कहीं और हिंसा की खबरें आती हैं, तो कृपया बिना सबूत के उन्हें इस आंदोलन से नहीं जोड़ें।''
आंग्मो ने प्रदर्शनकारियों के ''असीम धैर्य, अनुशासन और संयम'' का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी चिंताओं को सुनना जरूरी है।
आंग्मो ने कहा, ''मैं अक्सर सोचती हूं: ऐसी कौन सी व्यवस्था है जो अपने ही छात्रों पर इतनी जल्दी शक करने लगती है? उनकी चिंताओं को सुनने के बजाय उनके इरादों पर सवाल उठाना अधिक आसान क्यों लगता है?''
उन्होंने कहा, ''हमारे बच्चे सुरक्षा के हकदार हैं, न कि उन्हें खलनायक की तरह पेश किया जाना चाहिए। उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए, न कि ऐसे विमर्श से दबा दी जानी चाहिए जो किसी विशेष हित की पूर्ति करते हों।''
उनकी ये टिप्पणी 20 जुलाई को हुए 'चलो संसद' मार्च के बाद आई है, जिसमें दिल्ली पुलिस ने हजारों प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का इस्तेमाल करके संसद की ओर बढ़ने से रोक दिया था।
इस कार्रवाई के बाद कॉजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को हिंसक दिखाने और इसे राजधानी में हुई दूसरी घटनाओं से जोड़ने की कोशिशें की जा रही थीं। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
कॉजपा के नेतृत्व में 20 जून को यह आंदोलन शुरू हुआ था। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने, शिक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी।
वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वांगचुक अभी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा है कि यदि केंद्र सरकार यह आश्वासन दे कि आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज होगी, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
भाषा सुरभि सुरेश
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