अमेरिकी ने उत्तरी ईरान में हमले तेज किए, नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले जहाज पर किया हमला
जोहेब
- 16 Jul 2026, 06:27 PM
- Updated: 06:27 PM
दुबई, 16 जुलाई (एपी) अमेरिका ने बृहस्पतिवार तड़के ईरान पर हमले तेज करते हुए उत्तरी क्षेत्र को ज्यादा निशाना बनाया। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए तड़के पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाकर मिसाइल व ड्रोन हमले किए और चेतावनी दी कि उसके हमले तेज हो सकते हैं।
अमेरिकी बलों ने ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी के उल्लंघन की कोशिश करने के लिए एक जहाज पर गोलीबारी भी की।
अमेरिका और ईरान के बीच कई दिन से जारी हमलों और जवाबी हमलों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी गई धमकियों ने युद्ध को खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते को लगभग खत्म कर दिया है। इससे पूरे क्षेत्र में फिर से व्यापक युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ गया है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
इस बार के संघर्ष में पहली बार ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास के इलाकों में भी हमले हुए। इससे पता चलता है कि अमेरिका अब पहले से अधिक स्थानों को निशाना बना रहा है।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, जिसके बाद तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद कर दी थी। इसके कारण तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें पश्चिम एशिया से बाहर भी तेजी से बढ़ गई थीं। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बंद करने से बातचीत के दौरान ईरान की स्थिति मजबूत हो गई थी।
ईरानी सेना के खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम जुल्फिकारी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमला करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों पर अमल करता है, तो ईरान क्षेत्र में बुनियादी ढांचों पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है।
जुल्फिकारी ने कहा, "यदि ट्रंप की धमकी पर अमल किया गया तो क्षेत्र का पूरा बुनियादी ढांचा ईरान के शक्तिशाली सशस्त्र बलों के हमलों से तबाह हो जाएगा।"
उन्होंने कहा, "हम किसी भी स्थिति में और किसी भी तरीके से अमेरिका जैसे बाहरी देश को होर्मुज जलडमरूमध्य में दखल नहीं देने देंगे। यह ईरान की खींची हुई लाल रेखा है, जिसे पार नहीं किया जा सकता।"
बृहस्पतिवार तड़के अमेरिका ने तेहरान के आसपास हमले किए। सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका ने सेमनान प्रांत को भी निशाना बनाया, जहां ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण इकाइयां और अंतरिक्ष कार्यक्रम से संबंधित ठिकाने हैं।
ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि बृहस्पतिवार सुबह हमदान, होर्मोज़गान, खुज़ेस्तान, लोरेस्तान, मरकज़ी तथा सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांतों के आसपास भी हमले हुए।
अमेरिका ने बुधवार को दिन के समय भी ईरान पर हमले किए, जिससे साफ हुआ कि हमले तेज हो रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य स्थित रणनीतिक ग्रेटर तुंब द्वीप पर ईरान के रक्षा और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इस बीच अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने कुराकाओ के झंडे वाले तेल टैंकर 'बेल्मा' पर गोलीबारी की, जो फारस की खाड़ी में ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप की ओर जा रहा था।
अमेरिका के अनुसार, जहाज ने कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद एक अमेरिकी विमान ने उसकी चिमनी पर मिसाइल दागकर उसे चलने लायक नहीं छोड़ा।
बुधवार को एक अन्य अमेरिकी हमले में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ईरान की 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया। यह ब्रिगेड टैंकों और बख्तरबंद वाहनों का संचालन करती है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इस हमले में अमेरिका ने कम से कम 13 मिसाइलें दागीं, जिसकी वजह से प्रशिक्षु सैनिक और नियमित सैनिक समेत सात लोगों की मौत हुई और कई अन्य सैनिक घायल हुए।
बृहस्पतिवार सुबह ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। वहां के अधिकारियों ने हमलों की पुष्टि की, लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहतों की जानकारी नहीं दी गई। कुवैत ने बृहस्पतिवार दोपहर एक और हमले की सूचना दी।
इस बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र के शहर इरबिल पर रात में हुए ड्रोन हमले की निंदा की।
अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया।
यह हमला उस समय हुआ, जब प्रधानमंत्री अमेरिका की यात्रा पर थे और उन्होंने कहा था कि इराक ईरान-समर्थित समूहों समेत सभी गैर-सरकारी सशस्त्र संगठनों को निरस्त्र करने की दिशा में काम करेगा।
ताजा संघर्ष का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां ईरान अमेरिका के नियंत्रण वाले समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है।
अमेरिका ने बल प्रयोग करके जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की धमकी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कहीं बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः हजारों थल सैनिकों की जरूरत होगी।
अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार को 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। यह युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है, हालांकि यह लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से अभी काफी कम है। संघर्ष चरम पर पहुंचने के दौरान यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
तेल कीमतों में वृद्धि ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं, क्योंकि वह नवंबर में होने वाले चुनाव में संसद पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। हालांकि वाशिंगटन अब तक जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने में सफल नहीं हुआ है, जिसके बाद ट्रंप ने बुधवार को फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी।
ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि ईरान शांति समझौता करना चाहता है। लेकिन उन्होंने इसके बारे में कोई और जानकारी नहीं दी।
उन्होंने बुधवार को पेनसिल्वेनिया स्थित अमेरिकी आर्मी वॉर कॉलेज में कहा, " वे समझौता करना चाहते हैं। अब देखना यह है कि हमारे बीच समझौता होता है या हम इसे पूरी तरह खत्म कर देते हैं।"
तनाव कम करने के लिए कई देशों ने मध्यस्थता की कोशिश की है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अब भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि उसने माना कि मध्यस्थता करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "जब दोनों पक्ष टकराव की नीति से आगे बढ़ेंगे, तब शांति का रास्ता हमेशा मौजूद रहेगा।"
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी कहा कि तेहरान ने सद्भावना के संकेत के रूप में वर्ष 2024 से ईरान में हिरासत में रखे गए एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है। हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी।
मानवाधिकार मामलों के वकील जैरेड जेनसर ने एक बयान जारी कर बताया कि उनकी मुवक्किल डेना करारी को रिहा किया गया है।
उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी-ईरानी नागरिक हैं तथा एक गैर-लाभकारी संस्था संचालित करती हैं। जेनसर ने कहा कि करारी पर जासूसी का आरोप लगाया गया था।
ईरान ने फिलहाल उनकी रिहाई की पुष्टि नहीं की है।
एपी जोहेब अविनाश
अविनाश
जोहेब
1607 1827 दुबई