जनजातीय समूहों ने धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाने की मांग की
सुभाष
- 24 May 2026, 08:17 PM
- Updated: 08:17 PM
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) दिल्ली के लाल किला मैदान में रविवार को देशभर के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लाखों सदस्य एकत्र हुए और उन्होंने धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी से हटाने की मांग की।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध जनजातीय सुरक्षा मंच और सहयोगी समूहों द्वारा जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर लाल किले के मैदान में किया गया।
असम प्रांत के जनजातीय सुरक्षा मंच के मालया जिगदुंग ने कहा, "इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने की हमारी लंबित मांग को बल देना है। यह मुद्दा आदिवासी नेता कार्तिक ओरांव जी के समय से चला आ रहा है, जिन्होंने 1960 के दशक के अंत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समक्ष इसे उठाया था।"
जिगदुंग ने जोर देकर कहा कि इस जनसभा से अनुच्छेद 342 के तहत संविधान संशोधन के लिए व्यापक राष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी।
आयोजकों ने दावा किया कि देश भर के 500 से अधिक आदिवासी समुदायों के लगभग 1.5 लाख लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
जिगदुंग ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "यह हमारी सबसे पुरानी मांगों में से एक रही है और आदिवासी सुरक्षा मंच के गठन का मूल उद्देश्य भी यही है।"
असम के कार्बी आंगलोंग जिले के पूर्वोत्तर जनजाति धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच के आयोजन सचिव बलराम फांगचो ने कहा, ''इस तरह का कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया जा रहा है। हमें आदिवासी समुदायों के अस्तित्व की रक्षा करनी होगी। जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है, विशेषकर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति श्रेणी से हटा दिया जाना चाहिए। अनुच्छेद 342 के तहत संशोधन करके उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाया जाना चाहिए।''
कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली में पांच स्थानों राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कश्मीरी गेट के पास कुदसिया बाग और शास्त्री पार्क बस डिपो के निकट श्यामगिरी मंदिर से सांस्कृतिक यात्राओं के साथ हुई।
लगभग 2.5 से 3.5 किलोमीटर की दूरी तय कर, इन यात्राओं में शामिल लोग लाल किला मैदान में एकत्र हुए।
पारंपरिक वेशभूषा पहने प्रतिभागी जनजातीय झंडे लिए हुए, ढोल बजाते हुए और लोक नृत्य प्रस्तुत करते हुए दिल्ली की सड़कों पर निकले।
असम, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड, ओडिशा, अंडमान निकोबार तथा कई अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के समूहों ने इस आयोजन में भाग लिया।
आयोजकों ने इस कार्यक्रम को ''अपनी तरह का सबसे बड़ा जनजातीय सांस्कृतिक आयोजन'' करार दिया।
भाषा जितेंद्र सुभाष
सुभाष
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2405 2017 दिल्ली