एनडीटीवी ऋण मामला: दिल्ली की अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की
वैभव पवनेश
- 23 Jan 2025, 07:27 PM
- Updated: 07:27 PM
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एनडीटीवी से ऋण पुनर्भुगतान प्राप्त करने में आईसीआईसीआई बैंक की कथित अनियमितता के एक मामले में बृहस्पतिवार को सीबीआई की एक ‘क्लोजर रिपोर्टर’ स्वीकार कर ली और कहा कि ‘‘यह संतोषजनक लगती है’’।
विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने क्लोजर रिपोर्ट पढ़ने के बाद उसे और मामले में सीबीआई तथा शिकायकर्ता की दलीलों को स्वीकार कर लिया। शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह कोई विरोध याचिका दाखिल नहीं करना चाहते क्योंकि वह जांच से संतुष्ट हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘पूरी क्लोजर रिपोर्ट, उसके साथ संलग्न दस्तावेज, सीबीआई की ओर से सरकारी वकील द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों तथा शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान, जिसमें कहा गया है कि वह वर्तमान मामले में सीबीआई की जांच से संतुष्ट है, का अध्ययन करने के बाद, यह अदालत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करती है... क्योंकि किसी भी आरोपी द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 19(2) के तहत कोई आपराधिक कृत्य या उल्लंघन नहीं पाया गया है। इसलिए क्लोजर रिपोर्ट संतोषजनक प्रतीत होती है और इसलिए इसे स्वीकार किया जाता है।’’
सीबीआई ने पिछले वर्ष एक विशेष अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, क्योंकि उसकी छह साल की जांच में आईसीआईसीआई बैंक और एनडीटीवी के तत्कालीन प्रवर्तकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के बीच हुए लेन-देन में कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी। सीबीआई ने इस आधार पर मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की थी कि इसमें आपराधिकता या कानून के उल्लंघन का कोई तत्व नहीं था।
सीबीआई ने रिपोर्ट में दावा किया कि कोई मिलीभगत या आपराधिक साजिश नहीं रची गयी या किसी लोक सेवक या आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारियों द्वारा आधिकारिक पद का दुरुपयोग नहीं किया गया।
यह मामला क्वांटम सिक्योरिटीज लिमिटेड से जुड़े संजय दत्त की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि आईसीआईसीआई बैंक ने एनडीटीवी प्रवर्तकों की पूरी 61 प्रतिशत हिस्सेदारी को गिरवी रखे जाने के ऐवज में 2008 में 375 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया था।
साल 2022 में, अदाणी समूह ने एनडीटीवी में एक नियंत्रित हिस्सेदारी हासिल कर ली और उसने अल्पसंख्यक शेयरधारकों को अदा की गई कीमत से लगभग 17 प्रतिशत अधिक प्रीमियम पर रॉय से शेयर खरीदे।
पिछले साल अक्टूबर में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने वाली सीबीआई ने यह भी कहा कि एनडीटीवी के लिए ब्याज दर में कमी ‘केवल एक बार की घटना’ नहीं थी।
भाषा वैभव