चंडीगढ़ महापौर चुनाव: उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर्यवेक्षक नियुक्त
सुभाष दिलीप
- 27 Jan 2025, 06:44 PM
- Updated: 06:44 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) जयश्री ठाकुर को 30 जनवरी को होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों के ‘‘परस्पर सहमति वाले रुख’’ का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जयश्री ठाकुर को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करना उपयुक्त समझते हैं।’’
शीर्ष अदालत ने चुनाव की कार्यवाही पर्यवेक्षक की उपस्थिति में करने का निर्देश दिया। साथ ही, न्यायालय ने आदेश दिया कि इसकी वीडियोग्राफी की जाए।
पीठ ने मेयर चुनाव के निर्वाचन अधिकारी को स्वतंत्र पर्यवेक्षक से संपर्क करने और निर्धारित चुनाव तिथि से पहले पूर्व न्यायाधीश के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया।
आदेश में कहा गया, ‘‘पर्यवेक्षक को एक लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जिसका भुगतान चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा। सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।’’
मौजूदा महापौर कुलदीप कुमार की ओर से पेश हुए पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने सुझाव दिया कि उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किया जा सकता है।
चंडीगढ़ प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त किये जाने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन यह दृष्टांत नहीं बनना चाहिए जिससे कि सभी नगर निकाय शीर्ष अदालत का रुख करने लगें।
पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज करते हुए कहा कि वह केवल प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंतित है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम इस संबंध में स्पष्ट कर सकते हैं कि इस अदालत को अधिकारियों की निष्पक्षता, स्वतंत्रता पर कोई संदेह नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।’’
पीठ ने कहा कि उसने निर्धारित तिथि पर स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए याचिका पर नोटिस जारी किया।
आम आदमी पार्टी (आप) से चंडीगढ़ के महापौर कुलदीप कुमार ने एक याचिका दायर कर मतदान प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘गुप्त मतदान’’ के बजाय ‘‘हाथ उठाकर मतदान’’ का निर्देश देने का अनुरोध किया था। हालांकि, पीठ ने अनुरोध को खारिज कर दिया।
चौबीस जनवरी को, शीर्ष अदालत ने महापौर पद के लिए ‘‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’’ चुनाव सुनिश्चित करने की खातिर एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर विचार किया था। शीर्ष अदालत ने साथ ही संकेत दिया था कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जा सकता है।
पिछले साल 20 फरवरी को, शीर्ष अदालत ने विवादास्पद चुनाव के परिणाम को पलटते हुए आप-कांग्रेस गठबंधन के पराजित उम्मीदवार कुलदीप कुमार को केंद्र शासित प्रदेश का महापौर घोषित किया था। उस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अप्रत्याशित रूप से विजेता बनकर उभरे थे।
न्यायालय ने पूर्व निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह, जो भाजपा सदस्य हैं, के खिलाफ ‘‘गंभीर कदाचार’’ तथा न्यायालय के समक्ष कथित झूठे बयान के लिए मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। मसीह ने शीर्ष अदालत में दिये कथित झूठे बयान में कहा था कि मतपत्रों में छेड़छाड़ किये जाने के कारण उन्होंने आठ मतपत्रों को अमान्य करार दिया था।
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न्यायालय ने कहा था कि निर्वाचन अधिकारी, जो एक मनोनीत पार्षद हैं, द्वारा घोषित परिणाम स्पष्ट रूप से कानून के विरूद्ध है।
पिछले साल 30 जनवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा के मनोज सोनकर ने आप-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की थी, जिसके बाद मतपत्रों से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे।
सोनकर को 16 वोट मिले थे, जबकि कुमार को 12 वोट मिले थे।
भाषा सुभाष