चंडीगढ़ परियोजना पर सीबीआई की प्राथमिकी से ‘‘हैरान’’, कानून का उल्लंघन नहीं किया:गोदरेज प्रॉपर्टीज
निहारिका मनीषा
- 26 Feb 2025, 12:55 PM
- Updated: 12:55 PM
नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) गोदरेज प्रॉपर्टीज ने बुधवार को कहा कि वह चंडीगढ़ में पूरी हो चुकी एक परियोजना में पर्यावरण नियमों के कथित उल्लंघन के लिए कंपनी के खिलाफ केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने से ‘‘हैरान’’ है और वह ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएगी।
एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि सीबीआई ने बर्कले रियलटेक लिमिटेड और गोदरेज एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ चंडीगढ़ में अपनी परियोजना के विकास में कथित धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
सीबीआई ने पंजाब राजभवन के एक अवर सचिव की शिकायत पर 2023 में दर्ज प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों पर कार्रवाई की।
केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि बर्कले रियलटेक लिमिटेड (जिसे अब आरएसए मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) द्वारा विकसित बर्कले स्क्वायर और चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में गोदरेज एस्टेट डेवलपर्स द्वारा विकसित गोदरेज इटरनिया ने कथित तौर पर पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन किया है।
इस मामले पर गोदरेज प्रॉपर्टीज के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हम इस घटनाक्रम से हैरान हैं, जिसे अभी-अभी हमारे ध्यान में लाया गया है। एजेंसी द्वारा की गई यह कार्रवाई, गोदरेज इटरनिया (प्रोजेक्ट) के संबंध में हमें पिछले वर्ष प्राप्त नोटिस के अनुसरण में प्रतीत होती है, जिसमें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की मंजूरी न मिलने को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) का उल्लंघन बताया गया था, क्योंकि यह परियोजना सुखना वन्यजीव अभयारण्य के 10 किलोमीटर के दायरे में आती है।’’
कंपनी ने कहा कि इन नोटिस को कंपनी ने तत्काल चुनौती दी तथा इसके बाद सभी कार्यवाही चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में की, जिसमें यह दर्शाया गया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा 10 किलोमीटर का कोई व्यापक पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) निर्धारित नहीं किया गया था।
कंपनी ने कहा कि इन नोटिस को कंपनी ने तत्काल चुनौती दी तथा इसके बाद सभी कार्यवाही चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में की, जिसमें यह दलील दी गई कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 10 किलोमीटर का कोई व्यापक पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) निर्धारित नहीं किया गया था।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और हमने सभी तथ्य रिकार्ड में रख दिए हैं, जो स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि इस मामले में हमारी ओर से कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।’’
कंपनी ने कहा कि मूल आरोप यह है कि एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी नहीं ली गई, जो पर्यावरण मंजूरी का उल्लंघन है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हालांकि, ईसी ने कभी भी एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी लेने के लिए कोई शर्त नहीं रखी। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने 18 जनवरी 2017 को राजपत्र अधिसूचना के जरिये सुखना वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से अधिकतम 2.75 किलोमीटर की दूरी पर पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र की अंतिम सीमा अधिसूचित की। हमारी परियोजना सुखना वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से 6.6 किलोमीटर दूर है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ एनबीडब्ल्यूएल मंजूरी के अभाव में संबंधित विभागों द्वारा अनुमोदन प्रदान करना, जो कि ईसी के तहत स्पष्ट रूप से आवश्यक नहीं था। अपेक्षित अनुमोदन यानी ओसी और सीटीओ के साथ परियोजना के पूरा होने के 10 साल बाद और हमारे द्वारा उसमें दी गई शर्तों का पूरी तरह से पालन करने के बावजूद एक आपराधिक अपराध माना जा रहा है।’’
गोदरेज प्रॉपर्टीज ने कहा कि एक जिम्मेदार डेवलपर के रूप में उसने हमेशा परियोजना अनुमोदन में निहित शर्तों तथा निर्देशों का पालन किया है और किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हम अपने वकीलों से सलाह ले रहे हैं और परियोजना तथा इसके ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।’’
गोदरेज प्रॉपर्टीज देश के अग्रणी रियल एस्टेट डेवलपर में से एक है। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), पुणे और बेंगलुरु में इसकी अच्छी उपस्थिति है।
भाषा
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