उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेजने के निर्णय की पुष्टि की
राजकुमार रंजन
- 24 Mar 2025, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने सोमवार को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने के अपने निर्णय की पुष्टि की।
इससे पहले, अपने सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी की कथित बरामदगी के मामले से घिरे न्यायमूर्ति वर्मा से सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कामकाज वापस ले लिया था।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किये गये एक प्रस्ताव में न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला करने की केंद्र से की गयी सिफारिश सार्वजनिक की गयी।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘ उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च, 2025 को आयोजित बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की है।’’
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को कहा था कि दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की है और उन्हें स्थानांतरित करने का एक अलग प्रस्ताव है।
उच्चतम न्यायालय के बयान में कहा गया है, ‘‘न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर हुई घटना के संबंध में गलत सूचना और अफवाह फैलाई जा रही हैं।’’
इस बयान के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सूचना मिलने पर न्यायमूर्ति उपाध्याय ने ‘आंतरिक जांच प्रक्रिया, साक्ष्य और सूचना संग्रहण शुरू कर दी।’
बताया जा रहा है कि न्यायमूर्ति उपाध्याय ने 20 मार्च को उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की बैठक होने से पहले ही जांच शुरू कर दी थी। न्यायमूर्ति वर्मा का प्रस्तावित स्थानांतरण केंद्र द्वारा सिफारिश स्वीकार किए जाने के बाद प्रभावी हो सकता है।
नकदी की कथित बरामदगी 14 मार्च की रात को करीब 11 बजकर 35 मिनट पर यहां लुटियंस क्षेत्र में न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद हुई थी। अग्निशमन अधिकारी आग बुझाने आवास पर पहुंचे थे।
इसके बाद प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम और दिल्ली उच्च न्यायालय ने कई निर्देश जारी किए, जिनमें सोमवार को न्यायमूर्ति वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेना भी शामिल है।
प्रधान न्यायाधीश ने जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय को न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपने को कहा।
एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उच्चतम न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी पाए जाने की आंतरिक जांच रिपोर्ट 22 मार्च को देर रात अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी, जिसमें फोटो और वीडियो भी शामिल थे।
रिपोर्ट में न्यायमूर्ति वर्मा के जवाब के अलावा 14 मार्च को होली की रात अग्निशमन अभियान के दौरान उनके घर के एक स्टोररूम में कथित तौर पर मिली नकदी की तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं।
न्यायमूर्ति वर्मा ने स्टोररूम में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा नकदी रखने से "स्पष्ट रूप से" इनकार किया है।
उन्होंने कहा कि उनके सरकारी आवास से नकदी मिलने के आरोप स्पष्ट रूप से उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश प्रतीत होते हैं।
भाषा राजकुमार