विधानसभा ने राजस्थान कोचिंग सेंटर विनियमन विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा
पृथ्वी रंजन
- 25 Mar 2025, 12:40 AM
- Updated: 12:40 AM
जयपुर, 20 मार्च (भाषा) विधानसभा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के अनेक विधायकों की आलोचना के बीच राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025 को सोमवार को समीक्षा के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया।
इसके साथ ही सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ विधायकों और विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य में कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए राज्य विधानसभा में पेश इस विधेयक में छात्रों के दाखिले की न्यूनतम आयु 16 वर्ष की अनिवार्यता को हटाने तथा कई अनुपालनों को नरम करने के लिए सरकार की आलोचना की।
विधायकों द्वारा दिए गए सुझावों के बाद, उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने विधेयक को समीक्षा के लिए प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
सदन में बहस पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए बैरवा ने कहा, "सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव महत्वपूर्ण थे, जिसमें विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही गई। सुझावों का सम्मान करते हुए तथा विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मैं विधेयक को समीक्षा के लिए प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव करता हूं, ताकि सुझावों को शामिल किया जा सके।"
चर्चा के दौरान कुल 29 विधायकों ने विधेयक पर अपने सुझाव दिए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र की सलाह इस विधेयक से गायब है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्याओं के कारणों को जाने बिना कानून बनाने से कोई फायदा नहीं होगा।
धारीवाल ने कहा, "पिछली कांग्रेस सरकार ने इन आत्महत्याओं के पीछे के कारणों का पता लगाया। एक समूह ने अपने अध्ययन में पाया कि इसकी वजह शिक्षा और वित्तीय दबाव है। ऑनलाइन जुए और नशे की लत से कर्ज की वजह से पढ़ाई बाधित होती है।"
उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अध्ययन के आधार पर दिशा-निर्देश बनाए थे, जो वर्तमान विधेयक में गायब हैं।
उन्होंने कहा, "यह विधेयक अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक गया है। इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।"
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है। खान ने कहा, "केंद्र के दिशा-निर्देशों और इस विधेयक में कोई तालमेल नहीं है। जल्दबाजी में कोई निर्णय न करें। केंद्र ने प्रवेश के लिए 16 वर्ष की आयु की बात कही थी, लेकिन इस विधेयक में वह प्रावधान ही नहीं है।"
उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटरों के विनियमन के लिए प्राधिकरण बनेगा लेकिन इसमें जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया ने कहा कि प्राधिकरण को ताकत नहीं दी गई है। केंद्र ने निर्देश दिया था कि दाखिल की निर्धारित आयु 16 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसकी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि विधेयक लाने का इरादा अच्छा है, लेकिन इसे जल्दबाजी में लाया गया है। कई प्रावधानों से कोचिंग संस्थानों को फायदा होगा।
राष्ट्रीय लोकदल के विधायक सुभाष गर्ग ने कहा कि केंद्र ने जनवरी 2024 में दिशा-निर्देश जारी किए थे।
गर्ग ने कहा, "जब तक आप बच्चे के परिवार को जागरूक नहीं करेंगे, तब तक आप आत्महत्याओं को नहीं रोक पाएंगे। आत्महत्या के लिए केवल कोचिंग संस्थान ही जिम्मेदार नहीं हैं। परिवार का भी दबाव होता है। आयु सीमा महत्वपूर्ण है, लेकिन विधेयक में इसका उल्लेख नहीं है।"
सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक कालीचरण सराफ और गोपाल शर्मा ने भी विधेयक पर अपनी ही सरकार को घेरा और कहा कि विधेयक में प्रमुख प्रावधान गायब हैं।
सराफ ने कहा, "अगर यह विधेयक अपने मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो कोचिंग संस्थान राजस्थान से बाहर चले जाएंगे। हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इस विधेयक के कारण नौकरशाही हावी हो जाएगी।"
उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों, आम जनता, विद्यार्थियों और शिक्षकों से सलाह ली जानी चाहिए। राज्य और जिला स्तर पर समिति बनाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसमें जनप्रतिनिधि, एनजीओ या न्यायपालिका के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है। केंद्र ने दिशा-निर्देश दिए थे कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अगर कोई बच्चा दो दिन तक अनुपस्थित रहता है तो उसके माता-पिता को सूचित किया जाए, लेकिन वह प्रावधान भी गायब है।
सराफ ने कहा, "इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित न करें।"
विधायक गोपाल शर्मा ने सवाल उठाया कि विधेयक में दाखिल की न्यूनतम आयु सीमा क्यों गायब है। उन्होंने कहा कि विधेयक में केंद्र की दिशा-निर्देशों के कई प्रावधान गायब हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक में नियमों के उल्लंघन पर दो से पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
शर्मा ने कहा, "हालांकि यह अच्छी शुरुआत है, लेकिन जुर्माने से छोटी मछलियां फंसती नजर आ रही हैं।"
सदन में विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री बैरवा ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक बुधवार को विधानसभा में पेश किया जिसमें सभी कोचिंग सेंटरों का अनिवार्य पंजीकरण, कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए प्राधिकरण बनाना और पंजीकरण नियमों के उल्लंघन पर पांच लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यह विधेयक कोटा में विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्याओं के मामलों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोटा को देश भर के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए तैयारी करवाने वाले कोचिंग सेंटरों का केंद्र माना जाता है।
भाषा पृथ्वी